मोदी सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले बुधवार को जनता को तोहफा दिया है। दरअसल, सरकार ने कच्चे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर मूल सीमा शुल्क को 31 मार्च, 2022 तक समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही कृषि उपकर में भी कटौती की है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि शुल्क में कटौती 14 अक्तूबर से प्रभावी होगी और 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगी।
कच्चे पाम तेल पर अब 7.5 प्रतिशत का एआईडीसी लगेगा
कच्चे पाम तेल पर अब 7.5 प्रतिशत का कृषि अवसंरचना विकास उपकर (एआईडीसी) लगेगा, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल के लिए यह दर पांच फीसदी होगी। इस कटौती के बाद कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल पर प्रभावी सीमा शुल्क क्रमशः 8.25 प्रतिशत, 5.5 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत होगा।
खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घटा खाद्य तेलों पर आयात शुल्क
इसके अलावा सूरजमुखी, सोयाबीन, पामोलिन और पाम तेल की परिष्कृत किस्मों पर मूल सीमा शुल्क मौजूदा 32.5 प्रतिशत से घटाकर 17.5 प्रतिशत कर दिया गया है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने कहा, 'घरेलू बाजार और त्योहारी मौसम में खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटा दिया है।'
कच्चे पाम तेल पर प्रभावी आयात शुल्क 24.75 फीसदी
मौजूदा समय में कच्चे पाम तेल पर प्रभावी आयात शुल्क 24.75 प्रतिशत है, जबकि रिफाइंड पामोलीन और रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 35.75 प्रतिशत है। कच्चे सोयाबीन और रिफाइंड सोयाबीन तेल पर यह शुल्क क्रमशः 24.75 प्रतिशत और 35.75 प्रतिशत है। इसी तरह कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क 24.75 प्रतिशत और रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर 35.75 प्रतिशत का शुल्क प्रभावी है।