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आखिर भगवान श्रीकृष्ण को क्यों कहा जाता है रणछोड़? बड़ी रहस्यमय है कहानी

Fri, 20 Mar 2020 12:44 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
भगवान श्रीकृष्ण के चमत्कार और लीलाओं के बारे में कौन नहीं जानता है। वह भगवान विष्णु के अवतार थे, वह जो चाहे वो कर सकते थे और कई मौकों पर किया भी था। लेकिन एक ऐसा मौका भी आया था, जब श्रीकृष्ण को रणभूमि छोड़कर भागना पड़ा था, जिस वजह से उनका नाम रणछोड़ पड़ा था। अब आप सोच रहे होंगे कि वो तो भगवान थे, फिर उन्हें किसी से भागने की क्या जरूरत थी? दरअसल, इसके पीछे एक बेहद ही रहस्यमय कहानी है, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे।  
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
यह कहानी कुछ इस तरह है कि एक बार मगधराज जरासंध ने भगवान श्रीकृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा था, लेकिन वह सिर्फ अकेले नहीं बल्कि उसने श्रीकृष्ण के खिलाफ युद्ध के लिए यवन देश के राजा कालयवन को भी अपने साथ मिला लिया था। दरअसल, कालयवन को भगवान शंकर से ये वरदान मिला था कि न तो कोई चंद्रवंशी और न ही कोई सूर्यवंशी उसको युद्ध में हरा सकता है। उसे न तो कोई हथियार मार सकता है और न ही कोई अपने बल से हरा सकता है। 
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
भगवान शंकर से मिले वरदान की वजह से कालयवन खुद को अमर और अजेय समझने लगा था। उस लगने लगा था कि कोई भी उसे युद्ध में हरा नहीं सकता है और न ही मार सकता है। जरासंध के कहने पर कालयवन ने अपनी सेना के साथ मथुरा पर आक्रमण कर दिया। अब चूंकि श्रीकृष्ण जानते थे कि कालयवन को वो अपने बल से मार नहीं सकते हैं और न ही उनका सुदर्शन चक्र उसका कुछ बिगाड़ सकता है। इसलिए वो रणभूमि छोड़ कर भाग गए और एक अंधेरी गुफा में पहुंच गए।  

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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
श्रीकृष्ण जिस गुफा में जाकर छुपे हुए थे, उसमें पहले से ही इक्ष्वाकु नरेश मांधाता के पुत्र और दक्षिण कोसल के राजा मुचकुंद गहरी नींद में सोए हुए थे। दरअसल, उन्होंने असुरों से युद्ध कर देवताओं को जीत दिलाई थी। लगातार कई दिनों तक युद्ध करने की वजह से वह थक गए थे, इसलिए भगवान इंद्र ने उनसे सोने का आग्रह किया और उन्हें एक वरदान भी दिया, जिसके मुताबिक जो कोई भी उन्हें नींद से जगाएगा, वह जलकर भस्म हो जाएगा। 
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ऐसे हुआ था कालयवन का अंत - फोटो : Social media
राजा मुचकुंद को मिले वरदान की बात श्रीकृष्ण को पता थी, इसलिए वो कालयवन को अपने पीछे-पीछे उस गुफा तक ले आए, जहां राजा मुचकुंद सोए हुए थे। श्रीकृष्ण ने कालयवन को भ्रमित करने के लिए अपना पीतांबर राजा मुचकुंद के ऊपर डाल दिया। राजा मुचकुंद को देख कर कालयवन को लगा कि वह श्रीकृष्ण ही हैं और उससे डर कर अंधेरी गुफा में छुप कर सो गए हैं। इसलिए उसने श्रीकृष्ण समझ कर राजा मुचकुंद को ही नींद से उठा दिया। अब राजा मुचकुंद जैसे ही नींद से उठे, कालयवन वहीं जल कर भस्म हो गया। असल में यह भगवान श्रीकृष्ण की ही एक लीला थी। उन्होंने महाभारत के युद्ध में गीता का उपदेश देते हुए कहा भी था कि सृष्टि में जो कुछ भी होता है, उन्ही की इच्छा से होता है, तो जाहिर है कालयवन का अंत भी उन्ही की इच्छा से हुआ था।  
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