प्रतीकात्मक तस्वीर
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यह भीषण नरसंहार 18 फरवरी, 1983 को असम में हुआ था। अब ये क्यों हुआ था, इसके पीछे एक लंबा इतिहास है। दरअसल, असम पहले एक खुशहाल राज्य हुआ करता था। 1826 से पहले यहां अहोम वंश का शासन था, लेकिन अंग्रेजों ने बाद में इसे अपने अधिकार में ले लिया। 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेज यहां बंगाल और बिहार से मजदूरों को चाय के बागान में काम करने के लिए लाने लगे, जो बाद में असम में ही बस गए। अब चूंकि असम बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए वहां से भी बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठ के जरिए लोग असम आते रहे हैं। बाद में उन्हें वोट का अधिकार भी मिल गया था। इसी के खिलाफ 1980 के दशक में राज्य में एक आंदोलन चला था, जो बाद में नरसंहार की वजह बना।