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नेली नरसंहार: जब महज सात घंटे में मार दिए गए 2000 से ज्यादा लोग

Fri, 29 May 2020 03:10 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आज के समय में नेली नरसंहार के बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे, लेकिन इसे आजाद भारत के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक माना जाता है, जिसमें दो हजार से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। हालांकि गैर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह संख्या तीन हजार से भी अधिक है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये भीषण नरसंहार आखिर हुआ कहां था, क्यों हुआ था और कब हुआ था? तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसने तब के समय में लोगों की रातों की नींदें उड़ा दी थीं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यह भीषण नरसंहार 18 फरवरी, 1983 को असम में हुआ था। अब ये क्यों हुआ था, इसके पीछे एक लंबा इतिहास है। दरअसल, असम पहले एक खुशहाल राज्य हुआ करता था। 1826 से पहले यहां अहोम वंश का शासन था, लेकिन अंग्रेजों ने बाद में इसे अपने अधिकार में ले लिया। 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेज यहां बंगाल और बिहार से मजदूरों को चाय के बागान में काम करने के लिए लाने लगे, जो बाद में असम में ही बस गए। अब चूंकि असम बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए वहां से भी बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठ के जरिए लोग असम आते रहे हैं। बाद में उन्हें वोट का अधिकार भी मिल गया था। इसी के खिलाफ 1980 के दशक में राज्य में एक आंदोलन चला था, जो बाद में नरसंहार की वजह बना। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
18 फरवरी, 1983 की सुबह थी। असम के हजारों आदिवासियों ने नेली क्षेत्र के 14 गांवों में रह रहे बांग्लादेशी लोगों को घेर लिया। महज सात घंटे के अंदर दो हजार से भी अधिक लोगों को मार दिया गया। उस समय राज्य की पुलिस पर भी इस भीषण नरसंहार में शामिल होने का आरोप लगा था। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कहते हैं कि इस नरसंहार में मरने वालों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे, जो जान बचाकर भाग नहीं पाए। नरसंहार का बाद का नजारा बेहद ही डरावना था। नेली क्षेत्र में हर तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें बिछी पड़ी थीं। कई जगहों पर तो एक साथ 200-300 लाशें पड़ी थीं। यह वाकई में बेहद ही दर्दनाक और दिल को दहला देने वाली घटना थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कहा जाता है कि शुरुआत में नेली नरसंहार को लेकर सैकड़ों रिपोर्ट दर्ज हुईं और कुछ को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन इस भीषण नरसंहार के अपराधियों को सजा तो दूर, उनके खिलाफ मुकदमा तक नहीं चला। हां इतना जरूर हुआ कि इस नरसंहार में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी तौर पर मुआवजे के रूप में पांच-पांच हजार रुपये दिए गए। 
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