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आखिर क्या है रहस्यमय संगठन इलुमिनाती? 243 साल से बना है एक राज

Fri, 29 May 2020 11:00 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रहस्यमय इलुमिनाती संगठन का प्रतीक - फोटो : Pixabay
आप खुफिया एजेंसियों के बारे में तो जानते ही होंगे, जैसे- भारत की रॉ, इस्त्रायल की मोसाद, अमेरिका की सीआईए और ब्रिटेन की एमआई-6, लेकिन क्या आप इलुमिनाती के बारे में जानते हैं? शायद नहीं जानते होंगे, क्योंकि दुनिया के अधिकतर लोगों ने तो इसका नाम तक नहीं सुना होगा। यहां तक कि इलुमिनाती का जन्म जहां हुआ था, वही के अधिकतर लोग इसके बारे में नहीं जानते। तो चलिए जानते हैं कि आखिर ये इलुमिनाती है क्या और कहां से इसकी शुरुआत हुई थी?  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
असल में इलुमिनाती 18वीं सदी का एक खुफिया संगठन था, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह कई देशों में आज भी सक्रिय है और खुफिया बैठकें करता है। यहां तक कि जब दुनिया के किसी कोने में कोई घटना घटती है और उसके बारे में पहले से किसी को कुछ पता नहीं होता तो कह दिया जाता है कि उसमें इलुमिनाती का हाथ था। इसी वजह से इसे एक रहस्यमय संगठन माना जाता है। 
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'द बबुश्का लेडी' - फोटो : Social media
कुछ लोगों का मानना है कि 18वीं सदी में फ्रांस में हुई क्रांति के पीछे इलुमिनाती का ही हाथ था। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या में भी इसी संगठन का हाथ था। 22 नवंबर 1963 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इसको लेकर समय-समय पर कई खुलासे हुए हैं, लेकिन आखिर उनकी हत्या के पीछे का कारण क्या था और किसने उनकी हत्या करवाई थी, यह आज तक स्पष्ट नहीं हो सका है। माना जाता है कि उनकी हत्या के समय उनके आसपास एक महिला दिखी थी, जिसके हाथ में कैमरे की तरह दिखने वाला एक पिस्तौल था। इस महिला को 'द बबुश्का लेडी' के नाम से जाना जाता है। अब ये महिला कौन थी, इसके बारे में आज तक किसी को पता नहीं चल पाया है। 

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प्रोफेसर एडम वीशॉप्ट - फोटो : Social media
माना जाता है कि इलुमिनाती की शुरुआत जर्मनी के बावरिया सूबे में स्थित एक छोटे से शहर इंगोल्स्ताद में हुई थी। वर्ष 1776 में इंगोल्स्ताद यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एडम वीशॉप्ट ने इसकी शुरुआत की थी, जिसका नाम उन्होंने 'ऑर्डर ऑफ इलुमिनाती' रखा था। कहते हैं कि प्रोफेसर एडम वीशॉप्ट इस संगठन की मदद से कट्टरपंथ से आजाद एक नई दुनिया की स्थापना करना चाहते थे, जहां मजहब की दीवारें न हों और सबको बराबरी का हक हासिल हो।
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प्रोफेसर एडम वीशॉप्ट की किताब - फोटो : Social media
प्रोफेसर वीशॉप्ट की लिखी एक किताब आज भी इंगोल्स्ताद के म्यूजियम में सुरक्षित रखी हुई है। इस किताब में उन्होंने अपने काम के बारे में बताया है कि आखिर खुफिया संगठन इलुमिनाती की शुरुआत के पीछे उनका मकसद क्या था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
कहा जाता है कि प्रोफेसर वीशॉप्ट ने इलुमिनाती की शुरुआत अपने कुछ छात्रों के साथ की थी, लेकिन बाद में इस संगठन से हजारों लोग जुड़ गए थे। माना जाता है कि प्रोफेसर वीशॉप्ट के घर पर ही खुफिया बैठकें हुआ करती थीं। हालांकि यह संगठन बना तो था खुफिया तरीके से, लेकिन कुछ ही दिनों में इसके बारे में स्थानीय सरकार को पता चल गया और उन्होंने इसपर पाबंदी लगा दी। साथ ही प्रोफेसर वीशॉप्ट को भी दूसरे शहर में भेज दिया गया था, ताकि वो फिर से संगठन को बनाने की कोशिश ना करें, लेकिन माना जाता है कि इसके बावजूद संगठन लगातार सक्रिय रहा और आज भी है। 
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