Bihar Rain News: भाकपा नेताओं ने कहा कि पॉलीटेक्निक क्षेत्र, गांधी पथ, हाथी टोला, कोसी प्रोजेक्ट, पुरानी कचहरी, बटराहा, गंगजला की स्थिति नारकीय है। जनता की गाढ़ी कमाई की दो सौ करोड़ से अधिक की राशि लूटकर शहर को और बदसूरत बना दिया गया है।
सहरसा में जलजमाव एक अभिशाप बनकर रह गया है। दरअसल, थोड़ी सी बारिश होती है कि शहर के अधिकतर मोहल्लों की सड़कें डूब जाती हैं। नगर निगम जल निकासी की न तो अस्थायी व्यवस्था करता है और न ही स्थायी। सड़कों पर जमा पानी को सूखने के लिए धूप के सहारे छोड़ दिया जाता है। इन्हीं हालातों को देखते हुए पॉलिटेक्निक रोड पर घुटने भर जमे पानी में धान रोपकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विरोध जताया।
विज्ञापन
गौरतलब है कि सहरसा-मधेपुरा मुख्य मार्ग स्थित पॉलिटेक्निक रोड पर पॉलिटेक्निक कॉलेज के अलावा कई शिक्षण संस्थान हैं। मधेपुरा की ओर जाने वाली बसों का भी यही मार्ग है। लेकिन इस सड़क पर लंबी दूरी तक एक से डेढ़ फुट तक पानी जमा है। यह स्थिति सिर्फ बारिश के महीने में ही नहीं होती, बल्कि बेमौसम बारिश से भी यही हाल हो जाता है।
जानकारी के मुताबिक, बुडको ने शहर में 50 करोड़ रुपये का नाला बनवाया। करोड़ों की राशि से दो संप हाउस भी बने। लेकिन उसके बावजूद शहर को जल जमाव से मुक्ति नहीं मिली। दिनों-दिन जल जमाव की समस्या विकराल होती जा रही है। नगर निगम पर लापरवाही और करोड़ों की सरकारी राशि के लूट का आरोप लगाते भाकपा नेताओं ने जल जमाव के बीच धान रोपकर और सड़क जाम कर विरोध जताया।
विज्ञापन
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। भाकपा नेताओं ने कहा कि पॉलीटेक्निक क्षेत्र, गांधी पथ, हाथी टोला, कोसी प्रोजेक्ट, पुरानी कचहरी, बटराहा, गंगजला की स्थिति नारकीय है। जनता की गाढ़ी कमाई की दो सौ करोड़ से अधिक की राशि लूटकर शहर को और बदसूरत बना दिया गया है।