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कोरोना से हालात भयानक होंगे या मिलेगी राहत? जानिए ज्योतिषीय भविष्यवाणी

Mon, 05 Apr 2021 08:21 PM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली

सार

वायरस के लिए केतु एवं बुध और इनके नक्षत्रों का विचार किया जाता है। केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में वृश्चिक राशि में स्थित है जिस पर मंगल की दृष्टि है जो इसे और खतरनाक स्वरूप प्रदान कर रही है। 
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कोरोना वायरस की भविष्यणी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चैत्र प्रतिपदा 2020 में संवतसर कुंडली के अनुसार मैंने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना का भारत पर प्रभाव विश्व के अनुपात पर कम रहेगा और भारतीय वैज्ञानिक वैक्सीन की खोज करके विश्व को चकित कर देंगे। 26 दिसंबर 2019 का सूर्य ग्रहण हुआ जिसने बहुत पहले ही हमें इस भयानक अप्राकृतिक घटना के संकेत दे दिए थे। पीछे गए वर्ष में एक ऐतिहासिक अकल्पनीय घटना के रूप को पूरे वर्ष को देखा गया। 

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब गुरु और केतु का समीकरण धनु राशि में बनता है तो किसी ना किसी प्रकार से बीमारियों का संक्रमण इस काल में बढ़ता है जिससे जान माल की काफी क्षति होती है। केतु और गुरु के इस युति की पुनरावृत्ति 129 वर्षों के बाद होती है। इस युति में एक विशेष कारण यह था कि जब भी केतु और गुरु का आपसी संबध धनु राशि में बना तो उसका जो समय था वह बहतु छोटा होता था। 

कुछ महीने या कुछ दिन कहीं-कहीं पर मैंने केवल 15 दिनों का ही समीकरण पाया था। परंतु 2019 में जब यह गुरु केतु का समीकरण बना 5 नवबंर 2019 से प्रारभं होकर 24 सितबंर 2020 तक चला जो कि बहुत लंबा समय था और उस पर एक विपरीत कारण यह कि 25 जनवरी 2020 तक इस पर शनि महराज ने भी संबंध बनाए रखा और इस समीकरण को एक खतरनाक रूप दिया।

इसके बाद साल 2021 में एक बार फिर से षटग्रही योग 9 से 11 फरवरी के मध्य बना जिसकी भविष्यवाणी मैंने अमर उजाला के डिजिटल पेज पर की थी कि आने वाले समय में स्थितियां गंभीर होंगी, प्राकृतिक आपदा, जनहानि, वैश्विक महामारी की संभावना प्रबल बनती दिखाई दे रही थी।

इसके बाद स्थितियां भी गंभीर होती गयी, भूकंप, ग्लेशियर का टूटना साथ ही वैश्विक महामारी कोरोना ने फिर से पैर पसारने शुरू कर दिए, अब एकबार फिर से विश्व के साथ हमारे देश में कोरोना विकराल रूप धारण कर रहा है। ऐसे में हम फिर से संवत्सर कुंडली के माध्यम से आगे का भविष्य जानने की कोशिश करेंगे।
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ग्रह-नक्षत्र के हैं ये अशुभ संकेत
चैत्र प्रतिपदा 13 अप्रैल 2021 संवत्सर कुंडली में वृषभ लग्न उदय हो रहा है जोकि हमारे देश का लग्न भी है वहां पर राहु रोहिणी नक्षत्र में स्थित है। रोहिणी नक्षत्र पर जब भी शनि या राहु का गोचर होता है तो यह हमारे देश एवं पूरे विश्व के लिए घातक और संकट का कारण होता है और साथ में मंगल की स्थिति इसे विस्फोटक बना रही है। यहां पर यह भी बताना है कि संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों मंगल ही हैं तो मंगल और राहु की युति और राजा और मंत्री होना अच्छे संकेत नहीं हैं।

आगे क्या होगा कोरोना का भविष्य?
वायरस के लिए हम केतु एवं बुध और इनके नक्षत्रों को ही लेते हैं। यहां पर केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में वृश्चिक राशि में स्थित है जिस पर मंगल की दृष्टि है जो इसे और खतरनाक स्वरूप प्रदान कर रही है। इसके साथ ही साथ सूर्य चंद्रमा एवं बुद्ध तीनों ही रेवती नक्षत्र में स्थित हैं। ऐसी स्थिति में मुझे अभी तो कोविड-19 से इस वर्ष छुटकारा मिलते हुए नहीं दिखाई दे रहा है। 

जान-माल के नुकसान होने की संभावना
ग्रहों का यह समीकरण एवं अष्टम भाव पाप कर्तरी में स्थित होने के कारण जान माल के नुकसान होने की संभावना को भी प्रकट कर रहा है। हमारे देश में सीमाओं पर युद्ध की संभावना तो बनी ही हुई है। साथ ही सांप्रदायिक तनाव भी लगातार दिखाई दे रहा है। आतंकी घटना की भी संभावना पूरी तरह से बनी हुई है।

मंगल और देवगुरू बृहस्पति करेंगे शुभ संकेत
छठे भाव (जिसे रोग शत्रु के लिए देखा जाता है) के स्वामी शुक्र जो कि लग्न के स्वामी भी हैं। इस कुंडली में अस्त हैं इसलिए आगे की स्थितियां चिंताजनक दिखाई देती हैं, अच्छा संकेत है कि संवत्सर के अगले दिन मंगल, राहु की युति टूट रही है जोकि किसी विकराल स्थिति से बचने का संकेत भी है। अष्टमेश बृहस्पति भी दसवें भाव में अच्छी स्थिति का संकेत कर रहे हैं। 

कोरोना के समूल नाश के लिए करें यह उपाय
भारत भूमि धर्म को धारण करने वाली भूमि है और इतिहास साक्षी है कि हर आपदा को अवसर बनाकर हमने अपनी रक्षा की है। 13 अप्रैल से शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं, सभी देशवासियों को माता यानि शक्ति की उपासना आराधना पूर्ण संयम के साथ करनी चाहिए और इस कोरोना रूपी महिषासुर के समूल नाश के लिए माता भगवती का आवाह्न करना चाहिए। संयम का अर्थ है सरकार के दिशा निर्देश का पालन करना और संयम से ही अपने अंदर की उर्जा को जाग्रत करना है।
 
 
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