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कहीं जाते समय क्यों खिलाते हैं दही चीनी, इस परंपरा के पीछे धार्मिक के साथ है वैज्ञानिक आधार

Mon, 05 Apr 2021 05:58 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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दही
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कई रीति रिवाजों को लोग सदियों से मनाते चले आते हैं लेकिन ज्यादातर उन्हें उसके पीछे का कारण नहीं पता होता है। इसी तरह से हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य हो परीक्षा देने या फिर नौकरी के लिए इंटरव्यू के लिए जाना हो दही शक्कर खिलाने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। जब भी हम किसी जरूरी काम से बाहर जाते हैं तो हमारी मम्मी, दादी या नानी दही शक्कर जरूर खिलाती हैं। इसके पीछे धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से हर काम में सफलता प्राप्त होती है। इस परंपरा का निर्वहन लोग बहुत पहले समय से करते आ रहे हैं लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता है कि दही चीनी खिलाने के पीछे केवल धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक आधार भी है। तो चलिए जानते हैं इस परंपरा के पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक आधार।

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दही - फोटो : अमर उजाला
धार्मिक आधार
 
ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है और सफेद वस्तुओं चीनी एवं दही दूध आदि को चंद्र की चीजें माना जाता है। ऐसे में मानना है कि जब व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय यदि दही चीनी खाकर जाता है तो कार्य करते समय उसका मन एकाग्र रहता है। इसलिए माना जाता है कि यदि घर से दही चीनी खाकर जाया जाए तो कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
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दही खाकर बाहर निकलें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
दही चीनी खिलाने का वैज्ञानिक आधार
 
दही को तो सेहत के लिए अच्छा माना है जाता है इसलिए इसे भोजन में अवश्य शामिल करने की सलाह दी जाती है।दही में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जिससे काम करते या परीक्षा देते समय शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। दही में चीनी मिलाने से वह ग्लूकोज का एक काम करता है जिससे तुरंत ऊर्जा मिलती है। घर से निकलते वक्त इसलिए भी दही खाने की सलाह दी जाती है, ताकि व्यक्ति अपच, एसिडिटी जैसी समस्याओं से बचा रहे और काम पर पूरा ध्यान लगा सके।
 
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