हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर जितना कर्ज है उसमें इमरान सरकार का योगदान 40 फीसदी है। इस हालात में उसे दुनिया से कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है। पाकिस्तान कोविड-19 महामारी के बाद ऋण सेवा निलंबन पहल (डीएसएसआई) का पात्र बन गया है।
विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान उन शीर्ष 10 कर्जदार देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास सबसे ज्यादा बाहरी कर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक वह कोविड-19 महामारी के बाद ऋण सेवा निलंबन पहल (डीएसएसआई) का पात्र बन गया है। इस वजह से उसे अब विदेशी कर्ज हासिल करने में मुश्किलें आ सकती हैं।
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विश्व बैंक द्वारा जारी 2022 में अंतरराष्ट्रीय ऋण सांख्यिकी का हवाला देते हुए, पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बड़े कर्जदारों समेत डीएसएसआई की जद में आने वाले देशों को प्राप्त कर्ज की दर में व्यापक अंतर रहा है। डीएसएसआई के मुताबिक, दुनिया के 10 बड़े उधारकर्ताओं में अंगोला, बांग्लादेश, इथियोपिया, घाना, केन्या, मंगोलिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान, उजबेकिस्तान, और जांबिया शामिल हैं।
इनका संयुक्त विदेशी ऋण 2020 के अंत में 509 अरब डॉलर था, जो 2019 के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक है। यह डीएसएसआई के दायरे में आने वाले सभी देशों के कुल विदेशी कर्ज का 59 फीसदी रहा है। जबकि हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर जितना कर्ज है उसमें इमरान सरकार का योगदान महज 40 फीसदी है। इन हालात में उसे दुनिया से कर्ज मिलना मुश्किल हो सकता है।
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कर्ज मिलने में और भी कई मुश्किलें
विश्व बैंक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के लिए विदेशी ऋण शेयरों में 8 फीसदी की वृद्धि, वाणिज्यिक बैंकों से भुगतान रुकने और नई क्रेडिट लाइन का समर्थन करती है। इसके अलावा पाक में अन्य निजी लेनदारों से शुद्ध प्रवाह भी 2020 में 15 फीसदी बढ़कर 14 अरब डॉलर हो गया। जबकि एफडीआई प्रवाह मामूली रूप से 1.9 अरब डॉलर तक गिर गया। ऐसे में पाक को नया कर्ज मिलना आसान नहीं होगा।