दो साल से पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर आज भी सस्पेंस बरकरार है। हालांकि, दुनिया के दिग्गज विशेषज्ञों ने इसके लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन चीन मानने को तैयार नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार फिर इसे पता लगाने के लिए ग्रुप बनाया है। यह ग्रुप वुहान जाकर शुरुआती मामलों की जांच करेगा।
कोरोना संक्रमण को लेकर चीन एक बार फिर कटघरे में है। यह सवाल आज भी मौजूं है कि कोरोना वायरस कहां से और कैसे फैला। विश्व स्वास्थ्य संगठन एक बार फिर से यह पता लगाने की कवायद में जुटा है। ड्ब्ल्यूएचओ ने 26 विशेषज्ञों का एक नया एडवाइजरी ग्रुप बनाया है। जो चीन में कोरोना की उत्पत्ति की जांच कर संगठन को रिपोर्ट सौंपेगा।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)की एक टीम इस साल मार्च में भी चीन के वुहान शहर में चार हफ्तों तक रुक कर जांच की थी, लेकिन किसी पुख्ता नतीजे तक नहीं पहुंच पाई थी। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन से शुरुआती मामलों से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही ड्ब्ल्यूएचओ ने ये भी कहा है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति के बारे में पता करने की ये आखिरी कोशिश हो सकती है।
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने पहली जांच के बाद इस साल मार्च में जारी रिपोर्ट में कहा था कि हो सकता है कोरोना वायरस चमगादड़ से किसी दूसरे जानवर के जरिए इंसानों में पहुंचा हो, लेकिन अभी और रिसर्च की जरूरत है, क्योंकि महामारी के शुरुआती दिनों के डेटा की कमी के चलते जांच में दिक्कत आई थी। ऐसे में वुहान लैब का ऑडिट किया जाना चाहिए।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बनाया नया ग्रुप
इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए स्वास्थ्य संगठन ने नया एक्सपर्ट ग्रुप बनाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीफ टेड्रॉस एडहेनॉम ग्रेब्रेयेसस ने बताया कि दुनियाभर से मिले 700 आवेदनों में से 26 एक्सपर्ट को उनके वर्ल्ड क्लास एक्सपीरिएंस को ध्यान में रखते हुए चुना गया है। ये एनिमल हेल्थ, क्लिनिकल मेडिसिन, वायरोलॉजी और जीनोमिक्स से जुड़े हैं।
दिसंबर 2019 में आया पहला मामला
कोरोना का पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आया था और आशंका है कि वहीं से यह वायरस पूरी दुनिया में फैला। हालांकि, चीन बार-बार इसे इनकार करता रहा है कि वुहान की लैब से वायरस लीक नहीं हुआ।