वियतनाम के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति वो वान थुओंग का इस्तीफा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें 98 फीसदी से अधिक वोट हासिल हुए थे। इस्तीफा देते हुए उन्होंने बताया है कि वे अपने कार्यकाल की खामियों और नीतिगत असंतोष के कारण पद छोड़ रहे हैं।
वियतनाम के राष्ट्रपति वो वान थुओंग ने इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने उन खामियों को रेखांकित किया जिसके कारण उनके शासनकाल में जनता के बीच नकारात्मक राय बनी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति थुओंग की भूमिका काफी औपचारिक रहती थी। हालांकि, वियतनाम की सियासत का एक दिलचस्प पहलू ये भी है कि थुओंग राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय शख्स थे। चुने जाने के ठीक एक साल बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा क्योंकि उनकी पार्टी के खिलाफ नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा।
विज्ञापन
राजनीतिक सत्ता का संघर्ष पनपने के कारण इस्तीफा, रिश्वत विरोधी अभियान की भी चर्चा
वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी में फैसला लेने की अहम संस्था- सेंट्रल पार्टी कमेटी है। इस समिति ने भी राष्ट्रपति थुओंग का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों के मुताबिक थुओंग के इस्तीफे को वियतनाम में चल रहे रिश्वत विरोधी अभियान से भी जोड़ा जा रहा है। जनता के बीच पनप रहे असंतोष को थुओंग के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। आंदोलन का मकसद भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना है। हालांकि, इसके कारण राजनीतिक सत्ता का संघर्ष भी पनप रहा है।
पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
थुओंग के इस्तीफे से पहले करीब एक दशक पुराने भ्रष्टाचार के मामले में पार्टी के पूर्व प्रांतीय प्रमुख को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी थुओंग के कार्यकाल (पार्टी प्रमुख रहने) के दौरान ही हुई। पूर्व राष्ट्रपति गुयेन जुआन फुक के पद छोड़ने के बाद सांसदों ने डेढ़ महीने की मशक्कत के बाद थुओंग को अगला राष्ट्रपति चुना था। पार्टी ने पूर्व राष्ट्रपति गुयेन जुआन फुक को नियमों के उल्लंघन और गलत काम के लिए दोषी ठहराया था।
विज्ञापन
वर्तमान राजनीतिक संकट दूर हो सकता है, लेकिन व्यापारिक मोर्चे पर चिंताएं बरकरार
वियतनाम में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रमुख रणनीतिकार गुयेन फु ट्रोंग और थुओंग के बीच घनिष्ठ संबंध माने जाते हैं। ट्रोंग पार्टी महासचिव भी रह चुके हैं। माना जा रहा है कि थुओंग के इस्तीफे के बाद नए राष्ट्रपति की नियुक्ति से देश का वर्तमान राजनीतिक संकट दूर हो सकता है, लेकिन व्यापार को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। जनता के बीच पनपती असंतोष की भावनाओं के कारण व्यापार में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। यह पहलू इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वियतनाम विदेशी निवेश पर बहुत अधिक निर्भर है।