वेटिकन ने अलौकिक घटनाओं का मूल्यांकन करने के मानदंडों में सुधार किया है। वेटिकन के सिद्धांत कार्यालय ने कहा है कि इंटरनेट के जमाने में ये मानदंड अब उपयोगी नहीं रह गए हैं। वेटिकन ने कहा कि आजकल भूत-प्रेत के बारे में अफवाहें तेजी से फैलती हैं। इससे सामान्य लोगों को हानि भी हो सकती है। इतना ही नहीं धोखेबाज लोगों की मान्यताओं से ठगी करने भी कोशिश करते हैं। वे लोगों की आस्था का गलत फायदा उठाकर उससे पैसा कमाने की भी कोशिश कर रहे हैं।
वेटिकन ने शुक्रवार को इस बात पर अंतिम निर्णय लेने पर जोर दिया कि क्या ये घटनाएं आस्था के योग्य हैं। साथ ही वहां के सिद्धांत कार्यालय ने 1978 में पहली बार जारी किए गए मानदंडों में बदलाव भी किया। वेटिकन ने बताया कि नए मानदंडो में कैथोलिक चर्च की मूल्यांकन प्रक्रिया को फिर से परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि भूत-प्रेत से जुड़ी किसी भी घटना को अब चर्च के अधिकारी अलौकिक नहीं घोषित करेंगे।
कैथोलिक चर्च का एक लंबा और विवादास्पद इतिहास रहा है जिसमें लोगों का दावा है कि उन्होंने वर्जिन मैरी, खून के आंसू रोती हुई मूर्तियां के दर्शन किए हैं। चर्च के जिन लोगों ने वर्जिन मैरी के दर्शन करने का दावा किया है, उनमें पाद्रे पियो और पोप फ्रांसिस के साथ ही असीसी के सेंट फ्रांसिस का नाम शामिल है। इन लोगों ने लाखों कैथोलिकों को प्रेरित किया है।