पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व (Middle East) में इस्राइल और हमास के युद्ध के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर स्पष्ट चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने कहा कि हिंसक संघर्ष के कारण हिंद महासागर में समुद्री व्यापार असुरक्षित हो गया है।
गाजा में बीते 109 दिनों से जारी युद्ध में अब तक 25 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। गहराते मानवीय संकट को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर चिंता जताई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण समुद्री व्यापार पर भी संकट मंडरा रहा है। मध्य पूर्व में इस संकट के बीच हिंद महासागर में व्यापार से जुड़े खतरों को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने ठोस बयान दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि आर रवींद्र ने कहा कि लंबे समय से जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार संकट में है।
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भारत के ऊर्जा और आर्थिक हित सीधे तौर पर प्रभावित
रवींद्र ने मंगलवार को यूएनएससी में ओपन डिबेट के दौरान कहा, समुद्र में वाणिज्यिक यातायात की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। भारत के आसपास भी कई हमले हुए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बहुत चिंता का कारण है। इससे भारत के ऊर्जा और आर्थिक हित सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। गाजा में 100 से अधिक दिनों से जारी इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को भयावह बताते हुए उन्होंने कहा कि भयावह स्थिति को देखते हुए हालात की गंभीरता को स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया जाना जरूरी है।
राहत सामग्री की खेप पहुंचाने वाले देशों में भारत अग्रणी
भारत का ठोस पक्ष पेश करते हुए राजदूत रवींद्र ने इस्राइल और हमास का नाम लिए बिना दोनों के टकराव पर स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष की शुरुआत के समय से ही भारत ने कहा है कि पीड़ितों के बीच मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए युद्ध को रोकना काफी अहम है। मानवीय संकट की गंभीरता पर ध्यान देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जिस तत्परता से मदद की है, भारत इन प्रयासों की सराहना करता है। रवींद्र ने बताया कि गाजा के युद्धग्रस्त इलाकों में रहने वाले फलस्तीनी लोगों के बीच राहत सामग्री की खेप पहुंचाने वाले देशों में भारत अग्रणी रहा।
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भारत ने अब तक 41.58 करोड़ रुपये का फंड दिया
उन्होंने कहा, भारत ने फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) को दिसंबर में 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए। अब तक कुल 5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 41.58 करोड़ रुपये का फंड दिया जा चुका है। इस पैसे का इस्तेमाल शरणार्थियों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और दूसरी जरूरी चीजों के लिए किया जाना है।
इस्राइल और फलस्तीन की जनता स्थायी शांति चाहती है
फलस्तीन और इस्राइल को दो देश के रूप में मान्यता देने के भारत के रूख को दोहराते हुए राजदूत रवींद्र ने 'टू स्टेट सॉल्यूशन' ( Two-State solution) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फलस्तीनी लोग इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सुरक्षित सीमाओं के भीतर स्वतंत्र देश के रूप में रबह सकते हैं। हिंसा, टकराव और गतिरोध दूर करने का केवल एक ही रास्ता है, दोनों पक्ष सीधी और सार्थक बातचीत करें। इस्राइल और फलस्तीन की जनता स्थायी शांति चाहती है। दोनों पक्ष इसके हकदार भी हैं। भारत सभी पक्षों से तनाव कम करने, हिंसा से दूर रहने और तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचने की अपील करता है।