लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक बिल रोगियो ने शनिवार को सीएनएन से बातचीत में कहा- ‘तालिबान के खिलाफ लड़ाई में अफगान बलों की ताकत में 80 फीसदी योगदान अमेरिकी वायु सेना का था। उसकी वापसी से अफगान वायु सेना बहुत बड़े दबाव में आ गई है।’ इसके पहले संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों की निगरानी वाली एजेंसी यूएनएचसीआर ने बताया था कि तालिबान के आगे बढ़ने की वजह से दो लाख 94 हजार लोग बेघर हो चुके हैं। इससे अफगानिस्तान में युद्ध के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या 35 लाख तक पहुंच चुकी है। यूएसएचसीआर ने पिछले 21 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बीते जून में 77 हजार लोग विस्थापित हुए।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक तालिबान ने इस साल आरंभ से लड़ाई तेज कर दी। इस कारण देश में पांच हजार से ज्यादा लोग हताहत हो चुके हैं। ये संख्या 2020 में इसी अवधि में हताहत हुए कुल लोगों की संख्या से 47 फीसदी ज्यादा है। इस बीच उलटे तालिबान ने सरकारी बलों पर मानव अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। तालिबान के प्रवक्ता जबिनुल्लाह मुजाहिद ने एक ट्विट में कहा कि ‘किराए के सैनिकों’ ने लश्कर गोह में हवाई बमबारी की जिसमें निहत्थे लोगों मारे गए।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसने सैकड़ों सैनिकों को हेरात प्रांत में भेजा है। उन्हें वहां तालिबान को कुचलने के लिए भेजा गया है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि उससे वहां सुरक्षा की स्थिति सुधरेगी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि असल सूरत यह है कि हालत लगातार बिगड़ रही है।