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अमेरिका का दावा: चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल ने जुलाई में लगाया था दुनिया का चक्कर, अचानक परमाणु हमले की जताई आशंका

Fri, 19 Nov 2021 04:24 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिकी सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि चीन ने इस साल जुलाई में एक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था। उन्होंने कहा कि चीन कभी भी अमेरिका पर परमाणु हमला कर सकता है। हालांकि, चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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अमेरिकी सेना में दूसरे उच्चतम पद के अधिकारी ने चीन की ओर से जुलाई में किए गए हाइपरसोनिक हथियार के परीक्षण को लेकर नई जानकारी साझा की है। उन्होंने कहा कि इस हाइपरसोनिक मिसाइल ने आवाज की गति से पांच गुना अधिक रफ्तार से दुनिया का चक्कर लगाया था। इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है चीन अमेरिका पर कभी भी अचानक परमाणु हमला कर सकता है।

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संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के उप चेयरमैन जनरल जॉन हाइटेन ने 27 जुलाई को हुए चीन के हाइपरसोनिक हथियार परीक्षण पर बात करते हुए कहा कि उन्होंने एक लंबी रेंज की मिसाइल लॉन्च की थी। उन्होंने सीबीएस न्यूज से बात करते हुए कहा, 'इसने (मिसाइल) पूरी दुनिया का चक्कर लगाया जिसने एक हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन गिराया जो अपने लक्ष्य को बेधने के लिए वापस चीन गया।'

चीन की यह मिसाइल कुछ किलोमीटर से अपने निशाने को बेधने में चूक गई लेकिन यह पहली बार हुआ है जब किसी देश ने एक हाइपरसोनिक हथियार भेजा है जिसने पूरी धरती का चक्कर लगाया हो। वहीं, चीन ने साफ इनकार किया है कि उसने कोई हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण किया है। उसका कहना है कि हम एक रियूजेबल (दोबारा इस्तेमाल योग्य) स्पेसक्राफ्ट का परीक्षण कर रहे थे। 
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हाइपरसोनिक हथियार ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक रफ्तार से यात्रा करते हैं जिससे राडार पर इन्हें देख पाना काफी कठिन हो जाता है। हाइटेन का मानना है कि चीन अपनी युद्ध क्षमताओं में लगातार इजाफा कर रहा है। वह मिसाइल रखने के लिए नए सिलो बना रहा है और एक दिन वह अपनी क्षमताओं को इतना बढ़ाने में सक्षम हो सकता है कि अमेरिका पर अचानक परमाणु हमला कर सके।

हाइटेन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में चीन ने सैकड़ों हाइपरसोनिक परीक्षण किए हैं जबकि अमेरिका ने ऐसे केवल नौ परीक्षण किए हैं। चीन पहले ही एक मध्यम रेंज के हाइपरसोनिक हथियार को तैनात कर चुका है। जबकि अमेरिका अपने ऐसे पहले हथियार को तैनात करने में अभी कुछ साल दूर है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और चीन के बीच सभी संबंध पिछले काफी समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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