विश्लेषज्ञों का कहना है कि वुहान प्रयोगशाला के बारे में जांच से चाहे जो निष्कर्ष निकले, लेकिन यह साफ है कि कोविड-19 महामारी ने वायरस रिसर्च पर दुनिया का ध्यान केंद्रित कर दिया है। अब तक ऐसे अनुसंधान की अंतरराष्ट्रीय निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
कोबलेन्त्ज और लेन्तोज ने ध्यान दिलाया है कि 59 प्रयोगशालाएं सेफ्टी लेवल 4 के तहत चल रही हैं, लेकिन उनमें एक चौथाई में ही उच्चस्तरीय बायोसिक्युरिटी संबंधी व्यवस्था है। एक तिहाई में ऐसी व्यवस्था मध्यम दर्जे की है, जबकि 41 प्रतिशत में निम्नस्तरीय तैयारी है।
कुछ समय पहले अमेरिकी पत्रिका न्यूयॉर्क मैगजीन में छपे एक लंबे विश्लेषण में बताया गया था कि इस बात की काफी संभावना है कि वुहान में संक्रमण प्रयोगशाला से फैला हो। ऐसी घटनाएं दुनिया की दूसरी वायरस संबंधी प्रयोगशालाओं में भी हो चुकी हैँ।
अब फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका का स्वास्थ्य विभाग और सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल की निगरानी में 67 प्रकार के टॉक्सिन और संभावित खतरनाक सामग्रियों का इस्तेमाल प्रयोगशालाओं में होता है। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 13 बार ऐसे पदार्थ गायब हो गए और 219 बार वे लीक हुए। यह सिर्फ संयोग की बात थी कि उनसे कोई बीमार नहीं हुआ।
कई वैज्ञानिकों ने कहा है कि चीन ने वुहान प्रयोगशाला की अंतरराष्ट्रीय जांच के प्रति जैसी अनिच्छा दिखाई, उससे वहां मौजूद किसी समस्या का शक हुआ। लेन्तोज ने कहा- ‘हमने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के बारे में अब तक यही देखा है कि वहां क्या काम होता है, इस बारे में खुलापन और पारदर्शिता नहीं बरती गई है। लेकिन जब आप इस तरह की प्रयोगशालाएं बनाते हैं, तो आपको यह सुनिश्चित करना होता है कि वहां पूरी पारदर्शिता से काम हो।’