अब ये मामला एसएनपी के सालाना सम्मेलन के मौके पर जोरशोर से उठा है। इसी सम्मेलन में समापन भाषण देते हुए स्टरजन ने आजादी पाने का लक्ष्य हासिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए जनमत संग्रह होना चाहिए। उन्होंने कहा- जैसे लंदन स्थित कंजरवेटिव सरकार ब्रेग्जिट हासिल करके खुश हुई थी, उसी तरह स्कॉटलैंड के लिए भी ब्रिटेन से अलग होना खुशी की बात होगी।
एसएनपी ने कहा है कि यूरोप में स्कॉटलैंड जैसे आकार के देश मौजूद हैं और अपनी आजादी के साथ वे समृद्ध बने हैं। स्कॉटलैंड की आबादी 55 लाख से कुछ ज्यादा है। एसएनपी की दलील है कि ऑस्ट्रिया, नॉर्वे, आयरलैंड, डेनमार्क और फिनलैंड जैसे देश भी लगभग इतनी ही आबादी के हैं। स्वतंत्र रहना उन देशों के फायदे में साबित हुआ है।
एसएनपी के सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत जनमत संग्रह का एक मसविदा स्कॉलैंड की संसद में पेश किया जाएगा। अगर वह पारित हो गया, तो स्कॉलैंड सरकार जनमत संग्रह कराने के लिए कानून बना सकती है। स्कॉटिश संसद में एनएनपी का बहुमत है, इसलिए उस प्रस्ताव का पारित होना तय माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर स्कॉटलैंड की संसद से पारित कानून को ब्रिटिश सरकार ने रोकने की कोशिश की तो फिर मामला कोर्ट में जाएगा। कोर्ट को तब यह तय करना होगा कि स्कॉटिश सरकार को ब्रिटिश सरकार की सहमति के बिना जनमत संग्रह के लिए कानून बनाने का अधिकार है या नहीं।
स्टरजन ने कहा- ‘लोकतंत्र की अवश्य जीत होनी चाहिए।’ उन्होंने ब्रिटिश सरकार से इसके लिए सहयोग की अपील की। लेकिन ये मामला सद्भाव से हल होगा, अभी इसकी संभावना नहीं दिख रही है।