अमेरिका में दोनों टीके लगवाने के बाद भी संक्रमित (ब्रेकथ्रू इंफेक्शन) के कारण अस्पताल में भर्ती होने के आधे मामले अकेले कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में मिल रहे हैं। वहीं टीके लगवाने वाले सामान्य लोगों में ब्रेकथ्रू इंफेक्शन की दर 1 फ़ीसदी ही रही है।
अमेरिका में कमजोर इम्यूनिटी वालों को टीके की तीसरी खुराक की सलाह
यही वजह है कि अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) ने आधिकारिक तौर पर कमजोर प्रतिरक्षा वालों को कोरोना की तीसरी खुराक लेने की सलाह दी है। मिशीगन यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के सहायक प्रोफेसर जोनाथन गोलब का मानना है कि तीसरी डोज कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है।
कौन है कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग
कैंसर, एचआईवी, ऑटोइम्यून बीमारियों, अंग प्रत्यारोपण और गंभीर किडनी संबंधी रोगों से जूझने वाले लोगों को इस श्रेणी में रखा जाता है। उनका प्रतिरक्षा तंत्र बाहरी संक्रमण से बचाव में काफी कमजोर पड़ जाता है। बोन मैरो या बड़े अंग प्रत्यारोपण के बाद तो ऐसे मरीज को हेपेटाइटिस बी जैसे रोग के टीके नियमित लगाए जाते हैं।
ताकि दूसरों के लिए न बने खतरा
कोरोना वायरस तो कमजोर प्रतिरक्षा वालों के लिए काल साबित हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि यह वायरस उनके शरीर में लंबे समय तक बना रहता है। इसके चल रही है मरीज दूसरों के लिए भी ज्यादा समय तक खतरा बने रहते हैं।
इसलिए जरूरी तीसरी खुराक
लंबा संक्रमण और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वायरस के स्वरूप बदलने के लिए अनुकूल होते हैं। जिससे यह उसके अन्य लोगों को आसानी से संक्रमित करने की आशंका बढ़ जाती है। लिहाजा कोरोना के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण ही एक उपाय है। साथ ही कमजोर प्रतिरक्षा वालों को बचाने के लिए तीसरी डोज भी तेजी से दी जानी चाहिए।