आमतौर पर अंतरिक्ष मे दूसरे सौरमंडल कई आकार और रूप में नजर आते हैं। कुछ में बहुत सारे ग्रह हैं तो कुछ में बहुत बड़े ग्रह और कुछ में तो ग्रह नहीं भी होते। लेकिन धरती से 150 प्रकाश वर्ष दूर मिले एक सौरमंडल ने खगोल विज्ञानियों को अपना सर खुजाने पर मजबूर कर दिया है।
वजह अज्ञात, केवल अनुमान
इन ग्रहों के अजीब व्यवहार के पीछे एक विशाल आकाशीय पिंड को माना जा रहा है, जो अब तक हमारी पहुंच से दूर है। एक्स्टर विश्वविद्यालय इंग्लैंड की अध्य्यनकर्ता डॉ. श्वेता दलाल बताती हैं कि कुछ साक्ष्य सामने आए हैं कि हमारे बृहस्पति ग्रह जैसा कोई और ग्रह भी यहां हो सकता है। इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ध्रुवीय परिक्रमा करने वाले ग्रहों पर हो सकता है। तीसरा ग्रह चूंकि तारे के गुरुत्वाकर्षण में बेहद मजबूती से जुड़ा है, इसलिए उसकी परिक्रमा सामान्य है।
हम इसलिए सुरक्षित
हमारे सौरमंडल में बृहस्पति मौजूद है, लेकिन ग्रहों के परिक्रमा पथ एक दूसरे से दूर हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसी वजह से हम बृहस्पति के असर से बचे हुए हैं।
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