श्रीलंका में विद्रोही संगठन लिट्टे की याद में तमिल बहुल इलाकों में स्मृति दिवस बनाने की योजना बनाई जा रही है। इसे लेकर श्रीलंका की सेना और पुलिस हाई अलर्ट पर हैं। श्रीलंका में साल 2009 में लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण की श्रीलंकाई सेना के साथ हुई लड़ाई में मौत हो गई थी और इसके साथ ही श्रीलंका में अलग तमिल राष्ट्र की मांग को लेकर तीन दशक तक चले सशस्त्र विद्रोह का अंत हो गया था। उसी लड़ाई की याद में श्रीलंका में लिट्टे समर्थक स्मृति दिवस मनाने की योजना बना रहे हैं। हालांकि श्रीलंका की सरकार ने इसके आयोजन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।
श्रीलंका ने निगरानी के लिए बनाई विशेष टास्क फोर्स
श्रीलंका में सैन्य बलों को सूचना मिली है कि श्रीलंका में तमिल बहुल इलाकों में लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) की श्रीलंकाई सरकार से साल 2009 में हुई लड़ाई की याद में 15वां स्मृति दिवस मनाया जा सकता है। इस दौरान लड़ाई में मारे गए लिट्टे समर्थकों और लड़ाकों को याद किया जाएगा। हालांकि श्रीलंका की फिलहाल सेना की तैनाती की कोई योजना नहीं है, लेकिन सेना और पुलिस की विशेष टास्क फोर्स पूरे देश में इस आयोजन पर नजर रखेंगी। श्रीलंका में 15 मई से लेकर 20 मई तक लिट्टे का स्मृति दिवस मनाया जाएगा।
तमिल बहुल जाफना पर खास नजर
श्रीलंकाई सुरक्षा बलों का कहना है कि उन्हें ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि लिट्टे के स्मृति दिवस कार्यक्रम में कई जगह लिट्टे समर्थक साहित्य बांटा जा रहा है। कई कार्यक्रमों में लिट्टे को फिर से खड़ा करने की बात की अपील की गई। आरोप है कि भारत में भी लिट्टे को सक्रिय करने की कोशिश हो रही है। लिट्टे की शुरुआत साल 1983 में हुई थी, करीब तीन दशकों तक सशस्त्र संघर्ष के बाद साल 2009 में श्रीलंकाई सेना ने तमिल विद्रोही संगठन को कुचल दिया। तमिल नेताओं और संगठनों का कहना है कि लिट्टे स्मृति दिवस पर सिर्फ उन लोगों को याद करने के लिए आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने संघर्ष में अपनी जान दी। वहीं श्रीलंकाई पुलिस ने साफ कर दिया है कि अगर किसी भी संगठन या व्यक्ति ने लिट्टे के स्मृति दिवस को मनाने की कोशिश की तो उसे गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया जाएगा। श्रीलंकाई पुलिस ने आदेश के उल्लंघन के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है। खासकर श्रीलंका में तमिल बहुल जाफना में श्रीलंकाई पुलिस की विशेष नजर है।