जानकारों का कहना है कि चीन में सत्ता संघर्ष के बारे में फू के पास खास सूचनाएं थीं। एक दौर में अपनी इसी खूबी की वजह से पार्टी में उनका दर्जा बढ़ा। 2013 में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके प्रति अपनी वफादारी जताने का कोई मौका उन्होंने नहीं गंवाया। लेकिन वे कम्युनिस्ट पार्टी में शी के गुट से नहीं जुड़े हुए थे। इसलिए पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन्हें हमेशा शक की निगाह से देखा जाता था।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति शी के मन में पुलिस संगठनों के प्रति पुराना अविश्वास है। इस बात की मिसाल यह है कि 2017 में शी का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से तीन पूर्व उप सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों को हिरासत में लिया जा चुका है। उनमें मेंग होंगवेई 2018 में निशाना बने। सुन लिजुन 2020 में जांच के घेरे में आए। अब फू के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
बताया जाता है कि फू की जगह अब चेन यिशिन की नियुक्ति होगी, जिन्हें शी जिनपिंग का करीबी समझा जाता है। फिलहाल वे पार्टी के केंद्रीय राजनीतिक एवं वैधानिक आयोग के महासचिव हैं। ये आयोग न्याय और पुलिस विभागों की निगरानी करता है। चेन का संबंध लंबे समय के कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर शी जिनपिंग गुट से रहा है।
शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति बनने के बाद सत्ता पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत की है। इसके बावजूद उनकी कुछ नीतियों से पार्टी में असंतोष की खबरें आती रही हैँ। अक्सर सत्ता को चुनौती सेना या पुलिस से आती है। सेना पर शी का पूरा नियंत्रण बताया जाता है। अब उन्होंने पुलिस संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिश की है। एक पार्टी सूत्र ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘पार्टी के अंदर बहुत से लोग मानते हैं कि अभी कहानी पर परदा नहीं गिरा है। अगर शी पूरी राजनीतिक सुरक्षा की तलाश में हैं, तो ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी। उसका कोई अंत नजर नहीं आता।’