सीडीपी और कम्युनिस्ट पार्टी में पिछले 30 सितंबर को इस बात पर सहमति बनी थी कि अगर विपक्षी मोर्चा सत्ता में आया और सीडीपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, तो कम्युनिस्ट पार्टी सरकार बनाने के लिए उसे उसे अपना सीमित समर्थन देगी। कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि वह नई सरकार में किसी पद की मांग नहीं करेगी। अखबार जापान टाइम्स की एक टिप्पणी में इस समझौते को एतिहासिक बताया गया है। अखबार ने ध्यान दिलाया है कि पहली बार कम्युनिस्ट पार्टी ने चुनाव के बाद किसी पार्टी के साथ सहयोग करने का वादा किया है।
विश्लेषकों के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी पार्टियों के बीच कई अहम मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं। कम्युनिस्ट पार्टी अमेरिका के साथ जापान के सुरक्षा समझौते को वैध नहीं मानती। इसी समझौते के तहत जापान में अमेरिकी सैनिक अड्डे मौजूद हैं।
गठबंधन बनाने के लिए सीडीपी, कम्युनिस्ट पार्टी और बाकी दोनों छोटी पार्टियों ने एक संकल्प पत्र पर दस्तखत किए हैं। उसमें 2013 में पारित गोपनीयता कानून और 2015 में पारित सुरक्षा कानून को रद्द करने का वादा शामिल है। ये दोनों कानून पूर्व प्रधानमंत्री शिन्जो आबे के शासनकाल में बने थे। चारों दलों ने वादा किया है कि उनकी सरकार बनी तो वे ओकिनावा से हटा कर अमेरिकी सैनिक अड्डे को हेनोको इलाके में ले जाने के प्रस्ताव का विरोध करेगे। चारों दलों ने देश में न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और आय कर और कॉरपोरेट टैक्स दरों की समीक्षा करने का वादा भी किया है। जापान का ट्रेड यूनियन फेडरेशन सीडीपी का एक बड़ा समर्थन आधार रहा है।