श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी समगई जन बालावेगया (एसजेबी) ने कहा है कि राष्ट्रपति ने नागरिकों के मूल अधिकारों में कटौती करने के दुर्भावनापूर्ण मकसद से आपातकाल की घोषणा की है। वे देश को तानाशाही की ओर ले जाना चाहते हैं। लेकिन राजपक्षे सरकार में व्यापार मंत्री बानदुला गुनावर्धेना ने कहा है कि देश में एक साजिश के तहत जरूरी चीजों के दाम बढ़ाए जा रहे थे। देश में इन चीजों का कृत्रिम अभाव पैदा किया गया। इसे देखते हुए आपातकाल लागू करने के अलावा कोई और चारा नहीं था।
पिछले हफ्ते अधिकारियों ने कई जगहों पर छापा मार कर 29 हजार टन चीनी जब्त की। इस बीच देश के एक प्रमुख आयातक ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर वेबसाइट निक्कई एशिया को बताया कि आपातकाल के तहत नियम बना दिया गया है कि आयातक एक सीमा से ज्यादा खाद्य पदार्थों की खरीदारी नहीं कर सकते हैं। आयातक ने कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। आयातकों के पास बड़े ऑर्डर हैं, जिनकी सप्लाई वे करना चाहते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सरकार का दखल देना ठीक नहीं है।
आपातकाल के एलान के पहले श्रीलंका में पाउडर दूध, रसोई गैस, केरोसीन आदि जैसी चीजों की भारी कमी हो गई थी। इन्हें खरीदने के लिए लोगों को लंबी कतारें लगानी पड़ रही थीं। विरोधियों का कहना है कि इस अभाव के लिए खुद सरकार जिम्मेदार है, जिसने विदेशी मुद्रा बचाने के मकसद से पिछले साल मोटर वाहनों, कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामानों, कपड़ों, कॉस्मेटिक्स और मसालों का आयात रोक दिया था।