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टैक्स चोरी: 36 बड़े बैंकों ने यूरोपीय देशों को लगाया 20 अरब यूरो का चूना

Tue, 07 Sep 2021 04:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

रिपोर्ट के मुताबिक ये बैंक टैक्स चुराने के लिए मुख्य रूप से 17 टैक्स हैवेन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। टैक्स हैवेन उन देशों को कहा जाता है, जहां टैक्स दरें बहुत कम होती हैं। बहामा, केमैन आइलैंड्स और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स ऐसे ही देश हैं...
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यूरोपीय संघ - फोटो : pixabay
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विस्तार
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यूरोप के बड़े बैंकों ने पिछले सात साल में कम से कम 20 अरब यूरो की टैक्स चोरी की हैं। वे अपना एक चौथाई मुनाफा हर साल चोरी-छिपे उन देशों में ट्रांसफर करते रहे हैं, जिन्हें टैक्स हैवेन (कर चोरी का अड्डा) कहा जाता है। यूरोपियन यूनियन टैक्स ऑब्जरवेटरी (ईटीओ) की नाम के एक थिंक टैंक ने ये बात सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कही है। ये रिपोर्ट 36 बड़े बैंकों के व्यवहार के अध्ययन पर आधारित है। इन बैंकों में बार्कलेज, डियूश बैंक, दान्सके बैंक, स्टैंडर, आईएनजी, और यूनिक्रेडिट शामिल हैं।

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ईटीओ ने कहा है कि उसने टैक्स चोरी का अनुमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर निकाला है। इनमें बैंकों को हुई कुल आमदनी, टैक्स पूर्व मुनाफा, चुकाए गए टैक्स की रकम और उनके कर्मचारियों से संबंधित सूचनाएं शामिल हैं। ईटीओ ने 2014 से 2020 तक के उपलब्ध डाटा का अध्ययन किया। इसमें उन बैंकिंग कंपनियों को शामिल किया गया, जिनका सालाना राजस्व 75 करोड़ यूरोप से अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक ये बैंक टैक्स चुराने के लिए मुख्य रूप से 17 टैक्स हैवेन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। टैक्स हैवेन उन देशों को कहा जाता है, जहां टैक्स दरें बहुत कम होती हैं। बहामा, केमैन आइलैंड्स और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स ऐसे ही देश हैं। लेकिन ईटीओ का कहना है कि इन बैंकों ने सिर्फ कैरीबियाई द्वीपों में स्थित इन टैक्स हैवेन्स का ही इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उन्होंने यूरोप के अंदर भी आयरलैंड, लक्जमबर्ग और माल्टा में अपने मुनाफे को ट्रांसफर किया। ईटीओ ने कहा है कि बैंकों का ये व्यवहार यूरोप के करदाताओं के साथ धोखाधड़ी है।

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ये रिपोर्ट जारी होने के बाद यूरोपीय संसद की टैक्स उप-समिति के प्रमुख नीदरलैंड्स से चुने गए सांसद पॉल तांग ने बैंकों के व्यवहार को ‘निराशाजनक’ बताया। उन्होंने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि जब बैंक घाटे में रहते हैं, तो उनकी सार्वजनिक धन से मदद की जाती है। इसके बावजूद वे सरकारी खजानों में योगदान करने से बच रहे हैं। तांग ने कहा कि इससे ये संदेश मिला है कि अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम टैक्स रेट तय करने का प्रयास सही दिशा में एक कदम है।

ईटीओ का अनुमान है कि सभी 36 बैंकों ने अपने एक चौथाई मुनाफे को उन देशों में ट्रांसफर कर दिया, जहां टैक्स दर 15 फीसदी से कम है। ईटीओ को यूरोपियन यूनियन ने ये अध्ययन करने के लिए 12 लाख यूरो की फीस दी थी। ईटीओ ने पाया कि इन बैंकों ने टैक्स हैवेन्स में जिन कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी है, उन्हें हर साल औसतन दो लाख 38 हजार यूरो रकम का भुगतान तनख्वाह के रूप में किया गया। जबकि यूरोपीय देशों में मौजूद कर्मचारियों का औसत सालाना वेतन 65 हजार यूरो ही रहा।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूरोप में हाल के वर्षों में टैक्स हैवेन्स को लेकर बहस तेज हुई है। लेकिन ताजा रिपोर्ट से साफ है कि पिछले सात साल में बैंकों ने टैक्स हैवेन्स के इस्तेमाल में कोई कटौती नहीं की है। ईटीओ का अनुमान है कि अगर टैक्स हैवेन्स देशों में बैंकों ने न्यूनतम 15 फीसदी के हिसाब से टैक्स चुकाया होता, तो उन्हें हर साल तीन अरब से पांच अरब यूरो तक का अतिरिक्त कर देना पड़ता।
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