ये रिपोर्ट जारी होने के बाद यूरोपीय संसद की टैक्स उप-समिति के प्रमुख नीदरलैंड्स से चुने गए सांसद पॉल तांग ने बैंकों के व्यवहार को ‘निराशाजनक’ बताया। उन्होंने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा कि जब बैंक घाटे में रहते हैं, तो उनकी सार्वजनिक धन से मदद की जाती है। इसके बावजूद वे सरकारी खजानों में योगदान करने से बच रहे हैं। तांग ने कहा कि इससे ये संदेश मिला है कि अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम टैक्स रेट तय करने का प्रयास सही दिशा में एक कदम है।
ईटीओ का अनुमान है कि सभी 36 बैंकों ने अपने एक चौथाई मुनाफे को उन देशों में ट्रांसफर कर दिया, जहां टैक्स दर 15 फीसदी से कम है। ईटीओ को यूरोपियन यूनियन ने ये अध्ययन करने के लिए 12 लाख यूरो की फीस दी थी। ईटीओ ने पाया कि इन बैंकों ने टैक्स हैवेन्स में जिन कर्मचारियों की नियुक्ति कर रखी है, उन्हें हर साल औसतन दो लाख 38 हजार यूरो रकम का भुगतान तनख्वाह के रूप में किया गया। जबकि यूरोपीय देशों में मौजूद कर्मचारियों का औसत सालाना वेतन 65 हजार यूरो ही रहा।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक यूरोप में हाल के वर्षों में टैक्स हैवेन्स को लेकर बहस तेज हुई है। लेकिन ताजा रिपोर्ट से साफ है कि पिछले सात साल में बैंकों ने टैक्स हैवेन्स के इस्तेमाल में कोई कटौती नहीं की है। ईटीओ का अनुमान है कि अगर टैक्स हैवेन्स देशों में बैंकों ने न्यूनतम 15 फीसदी के हिसाब से टैक्स चुकाया होता, तो उन्हें हर साल तीन अरब से पांच अरब यूरो तक का अतिरिक्त कर देना पड़ता।