आसियान-भारत समिट में शामिल होने लाओस की राजधानी वियनतियाने पहुंचे पीएम मोदी ने जापान और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें की है। वहीं इन बैठकों में पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
जापानी पीएम के साथ पीएम मोदी की बैठक
दो दिवसीय यात्रा पर लाओस की राजधानी पहुंचे पीएम मोदी ने 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान जापानी पीएम इशिबा से मुलाकात की और उन्हें उनकी नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और जापान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफलता की कामना की। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, प्रधानमंत्री इशिबा के साथ बहुत ही उपयोगी बैठक हुई। मैं जापान के प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही दिनों बाद उनसे मिलकर खुश हूं। हमारी बातचीत में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई। सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।
बता दें कि शिगेरू इशिबा को पिछले सप्ताह ही जापान का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। उन्होंने फुमियो किशिदा का जगह लिया, जिन्होंने नए नेता के चयन के लिए करने के लिए पद छोड़ दिया था।
इन मुद्दों पर जापानी पीएम के साथ चर्चा
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार जापान के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा- जापान-भारत संबंधों को बढ़ावा देना, एक्ट ईस्ट नीति को मजबूत करना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने आज 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के अवसर पर सार्थक बातचीत की। चर्चा प्रौद्योगिकी, व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, सांस्कृतिक और पी2पी आदान-प्रदान में साझेदारी को गहरा करने पर केंद्रित थी।
भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का इंतजार
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि, दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास, रक्षा और सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, कौशल, संस्कृति और लोगों के बीच आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपरिहार्य साझेदार हैं और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस दौरान बयान में कहा गया कि, दोनों नेताओं ने अगले भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
न्यूजीलैंड के पीएम के साथ भी पीएम की बैठक
वहीं न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ अपनी बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक सहयोग, पर्यटन, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की। यह दोनों नेताओं के बीच पहली बैठक थी। पीएम मोदी ने इस बैठक के बारे में सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ शानदार बैठक हुई। हम लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता से बंधे न्यूजीलैंड के साथ अपनी मित्रता को महत्व देते हैं। हमारी बातचीत में आर्थिक सहयोग, पर्यटन, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
जबकि इस बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा- साझेदारी के क्षेत्रों का और विस्तार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, डेयरी, कृषि-तकनीक, खेल, पर्यटन, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लगातार उच्च-स्तरीय संपर्कों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत गति प्रदान की है। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत के राष्ट्रपति की हाल की न्यूजीलैंड यात्रा को याद किया, जो एक बड़ी सफलता थी।
पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड के पीएम को दिया न्योता
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के न्यूजीलैंड के फैसले का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री लक्सन को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथियों पर भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।