आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद, भारत की सर्वाधिक वांछित आतंकियों की सूची में शामिल है। 26 नवंबर 2008 (26/11) को मुंबई में हुए आतंकी हमले में भी इसका हाथ था। इस घटना में 166 लोग मारे गए थे। तब भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था। लेकिन पाकिस्तान लगातार सईद को आतंकी मानने से इनकार करता रहा है।
अमेरिकी सरकार की वेबसाइट रिवार्ड्स फॉर द जस्टिस में भी हाफिज सईद को जमात-उद-दावा, अहले हदीद और लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक बताया गया है। अहले हदीद एक ऐसा इस्लामिक संगठन है जिसकी स्थापना भारत में इस्लामिक शासन लागू करने के लिए की गई है। हाफिज मूलरूप में इंजीनियर है और अरबी भाषा का प्रोफेसर भी रह चुका है।
अमेरिका ने दुनिया में 'आंतकवाद के लिए जिम्मेदार' लोगों की सूची में भी हाफिज का नाम शामिल किया है। उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम भी रखा गया है। सईद अरबी और इंजीनियरिंग का प्रोफेसर भी रह चुका है। जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगने के बाद उसने एक नया आतंकी इस्लामी संगठन बनाया जिसका मकसद भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना है। मुंबई आतंकी हमलों में हाफिज की भूमिका को लेकर भारत ने उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर रखा है, वहीं अमेरिका ने उसे विशेष निगरानी सूची में रखा है।
11 सितंबर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद लश्कर-ए-तैयबा पर दुनिया की नजरें टिकीं और अमेरिका ने लश्कर को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने भी लश्कर पर प्रतिबंध लगा दिया। उसके बाद हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा का नया नाम जमात-उद-दावा रखा, हालांकि हाफिज सईद इस बात से इनकार करता है कि जमात-उद-दावा का लश्कर से कोई संबंध है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मुंबई आतंकी हमलों के तुरंत बाद दिसंबर 2008 में जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था। मुंबई हमलों के बाद सईद को अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए छह महीने से कम समय तक नजरबंद रखा गया था। लाहौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था।
पाकिस्तान में भी जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध है लेकिन वह जिहाद के लिए पैसा जुटाता है, उसका प्रमुख हाफिज सईद खुलेआम जिहाद के लिए लोगों को प्रोत्साहित भी करता रहता है।
हाफिज सईद ने अफगानिस्तान में जिहाद का प्रचार करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 1985 में जमात-उद-दावा-वल-इरशाद की स्थापना की थी। लश्कर-ए-तैयबा को उसकी शाखा बनाया गया था। 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफगानिस्तान से निकल गए तो हाफिज सईद ने अपने मिशन को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया।
भारत को पठानकोट जैसे दर्द अभी आगे भी झेलने पड़ेंगे।
आठ लाख से ज्यादा फौजी कश्मीर में जनसंहार को अंजाम दे रहे हैं।
पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की जद में भारत, इसराइल और पश्चिमी देश हैं।
भारत में अपने धर्म की वजह से परेशानी झेल रहे मुसलमान पाकिस्तान आ सकते हैं।
शाहरुख चाहें तो पाकिस्तान आ सकते हैं।
भारत जंग चाहता है और पाकिस्तान को उसे करारा जवाब देना ही होगा। एक बार पाकिस्तान करारा जवाब देगा तो पूरा भारत घुटनों के बल झुका होगा।
भारत ने पाकिस्तान के हर शहर, कस्बे और गांव को जंग का मैदान बना दिया है। पाकिस्तान को इसका जवाब देने का हक है। भारत अफगानिस्तान की सीमा का यूज करके हमारे देश में आतंकवाद फैला रहा है और इसमें अमेरिका भी उसकी मदद कर रहा है। केवल बयानबाजी करके हम अपना डिफेंस नहीं कर सकते। भारत को उसके ही अंदाज में जवाब देना जरूरी है। हमें दुनिया को ये मैसेज देना जरूरी है कि हम कश्मीरियों के साथ खड़े हैं और उन्हें निर्दोष लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। भारत 26/11 का प्रोपेगैंडा कर पाकिस्तान में रोज यही काम दोहरा रहा है।