पाकिस्तान के हिंदू विधायक और हिंदू समुदाय के लोगों ने अल्पसंख्यक बिल का विरोध करने वाली पार्टियों की आलोचना की। पाकिस्तान में पारित होने वाले हिंदू बिल के मुताबिक ‘जबरन धर्म परिवर्तन’ को अपराध माना जाएगा।
पिछले सप्ताह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पारित हुए बिल में जबरन धर्म परिवर्तन को अपराध मानते हुए मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया है। हालांकि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है। पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सांसद डॉक्टर राजेंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि सिंध की सरकार ने इस बिल में धर्म परिवर्तन की न्यूनतम आयु 18 वर्ष रख कर सराहनीय काम किया है।
पाकिस्तान के सिंध में हिंदू धर्म की महिलाओं को जबरन उठा ले जाने और उनसे शादी करने की घटनाएं आम हो गई थीं, जिसके बाद उन महिलाओं के पास मुस्लिम धर्म अपनाने के अलावा और कोई चारा नही बचता।
सांसद रमेश ने जमात-ए-इस्लामी प्रमुख सिराजुल हक से संसद के बाहर मुलाकात कर बिल का विरोध न किए जाने की अपील की। पाकिस्तान की दो पार्टियां जमियत उलेमा इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी बिल के माध्यम से पाकिस्तान को उदार और सेक्युलर राष्ट्र बनाने की साजिश बताते हुए इसके पारित होने का विरोध कर रही हैं।