'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की खबर के मुताबिक, काकर ने कहा कि सभी लंबित फैसले और प्रस्ताव अब नई सरकार के पास भेज दिए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा, हम अब नई सरकार के शपथ ग्रहण का इंतजार कर रहे हैं। हम बाद में नई सरकार की गतिविधियों और परियोजनाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएंगे। बलूचिस्तान के नेता काकर पिछले साल अगस्त में कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे।
इस बीच, सोमवार को नया संवैधानिक संकट तब खड़ा हो गया, जब राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने 29 फरवरी को नई नेशनल असेंबली के पहले सत्र को बुलाने के प्रस्ताव को कथित तौर पर खारिज किया। जिओ न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि राष्ट्रपति अल्वी ने कार्यवाहक संसदीय मामलों के मंत्रालय के प्रस्ताव को खारिज किया और कहा कि सभी आरक्षित सीट को सत्र को बुलाने से पहले आवंटित किया जाएगा, जिसमें नेशनल असेंबली के नवनिर्वाचित सदस्य शपथ लेंगे।
2018 में देश के राष्ट्रपति बनने से पहले अल्वी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की ओर झुकाव रखने वाले नेता हैं। खबर में कहा गया, राष्ट्रपति के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद नेशनल असेंबली के निवर्तमान स्पीकर राजा परवेज अशरफ ने 29 फरवरी को नेशनल असेंबली का सत्र बुलाने का फैसला किया। यह फैसला नेशनल असेंबली सचिवालय के उन वरिष्ठ अधिकारियों और संवैधानिक विशेषज्ञों के परामर्श का पालन करता है। जिन्होंने राष्ट्रपति के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने से पैदा हुई स्थिति की समीक्षा की।
'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार की खबर के मुताबिक, संवैधानिक प्रावधान के अनुसार नेशनल असेंबली की बैठक चुनाव के 21 दिनों के भीतर बुलाई जानी चाहिए। अनुच्छेद 91 के तहत 29 फरवरी को यह आदेश दिया गया है।
अगर नेशनल असेंबली की बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार 29 फरवरी को होती है, तो नए स्पीकर का कार्यक्रम शपथ के बाद उसी दिन जारी किया जाएगा। इसके बाद एक मार्च को स्पीकर के चुनाव के लिए कागजात जमा किए जाएंगे और दो मार्च को डिप्टी स्पीकर के साथ स्पीकर का चुनाव किया जाएगा।