उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान संबंध थोड़े असंतुलित थे। उन्होंने कहा कि यह असंतुलित रिश्ता था क्योंकि अमेरिका को लगता था कि वो पाकिस्तान को सहायता दे रहा है। उन्हें लगता था कि पाकिस्तान को ऐसे में अमेरिका की आज्ञा माननी होगी। और अमेरिका की बात को मानने की कोशिश के चलते पाकिस्तान को काफी कीमत चुकानी पड़ी…70 हजार पाकिस्तानी मारे गए, और 150 अरब डॉलर से ज्यादा का अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा क्योंकि आत्मघाती हमले हो रहे थे और पूरे देश में बम फट रहे थे।
खान ने कहा कि इस असंतुलित रिश्ते के साथ मुख्य समस्या थी कि “पाकिस्तानी सरकार ने वह करने की कोशिश की जिसमें वह सक्षम नहीं थी” और इसकी वजह से “दोनों देशों में अविश्वास” पैदा हुआ। उन्होंने कहा, “और पाकिस्तान में लोगों को लगता है कि उन्होंने इस रिश्ते के लिये भारी, बहुत भारी कीमत चुकाई। और अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान ने पर्याप्त काम नहीं किया।”
साक्षात्कार में खान ने यह भी दावा किया कि भारत में अगर कोई दूसरी सरकार होती को पाकिस्तान के उनके साथ रिश्ते बेहतर होते और वे बातचीत के जरिये अपने सभी मतभेदों को सुलझाते। उन्होंने कहा, “जब मैंने पदभार संभाला था, तो मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक सामान्य, सभ्य कारोबारी रिश्ते (बनाने) का नजरिया रखा…हमनें कोशिश की लेकिन बात आगे बढ़ी नहीं।” खान ने दावा किया, “अगर वहां कोई दूसरा भारतीय नेतृत्व होता, मुझे लगता है हमारे उनके साथ अच्छे रिश्ते होते। और हां, हम अपने सभी मतभेदों को बातचीत के जरिये सुलझा लेते।
भारत द्वारा अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को वापस लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के बाद दोनों देशों में संबंध और बिगड़ गए। कश्मीर में यथास्थिति पर खान ने कहा, “मुझे लगता है कि यह भारत के लिये एक आपदा है क्योंकि इसका मतलब होगा कि यह विवाद बना ही रहेगा…और भारत तथा पाकिस्तान के बीच रिश्तों-सामान्य रिश्तों- में(बाधक) रहेगा।”
भारत पाकिस्तान को बता चुका है कि वह पड़ोसी से सामान्य रिश्ते चाहता है जो आतंकवाद, दुश्मनी और हिंसा से मुक्त हों। खान ने कहा कि अमेरिका की यह धारणा गलत थी कि चीन के खिलाफ भारत सुरक्षा कवच होगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह भारत के लिये नुकसानदेह होगा क्योंकि चीन के साथ भारत का कारोबार दोनों देशों के लिये लाभकारी होगा।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान “सामने आ रहे परिदृश्य को थोड़ी चिंता के साथ देख रहा है।”