चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) प्राधिकरण के प्रमुख ने अमेरिका पर इस कई अरब डॉलर की परियोजना को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान की एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। सीपीईसी की शुरुआत साल 2015 में हुई थी जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाकिस्तान का दौरा किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी चीन को सड़क, रेलवे और बुनियादी ढांचे व विकास की अन्य परियोजनाओं के नेटवर्क के जरिए दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ना है।
प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक खालिद मंसूर शनिवार को कराची में इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में सीपीईसी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यहां सीपीईसी के मुद्दों को लेकर मंसूर ने कहा कि उभरती भू-रणनीतिर स्थिति को देखते हुए, एक बात स्पष्ट है कि संयुक्त राज्य अमेरिका सीपीईसी का विरोधी है, और भारत भी उसका समर्थक है। 'डॉन' की एक रिपोर्ट के अनुसार कई पश्चिमी थिंक टैंक ने सीपीईसी को एक आर्थिक जाल करार दिया है जिसके चलते पहले ही सार्वजनिक ऋण का स्तर बढ़ गया है।
अमेरिका के साथ भारत पर भी लगाया आरोप
मंसूर ने कहा कि अमेरिका और भारत पाकिस्तान को चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि एक वैश्विक बुनियादी ढांचा विकास योजना है और इसके तहत चीन की सरकार लगभग 70 देशों में भारी निवेश कर रही है। सीपीईसी के हिस्से के रूप में वर्तमान समय में 27.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाली लगभग 71 परियोजनाओं का संचालन हो रहा है। पाकिस्तान, चीन की इस विदेशी विकास वित्तपोषण परियोजना का सातवां सबसे बड़ा लाभ कमाने वाला देश है।
'चीन के खिलाफ सभी कोशिशें नाकाम होंगी'
उन्होंने कहा कि पश्चिमी ताकतें सीपीईसी को चीन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के प्रतीक के रूप में देखती हैं, लेकिन वह इस आशंका को काफी हद तक दूर करने में सफल रहा है। मंसूर ने कहा कि हम अपने लाभ किसी भी कीमत पर छोड़ने वाले नहीं हैं। हम पूर्व में पश्चिमी गठबंधन में अपनी उंगलियां जला चुके हैं, फिर ऐसा नहीं होगा। मंसूर ने आगे कहा कि क्षेत्र में चीन के सामरिक प्रभाव को कम करने की उनकी कोशिशें नाकाम होंगी। अमेरिका अब इस क्षेत्र से हटने के आर्थिक व राजनीतिक परिणामों का जायजा ले रहा है।
अफगानिस्तान को हिस्सा बनाने की कोशिश
मंसूर ने कहा कि इस्लामाबाद, अफगानिस्तान में सीपीईसी का विस्तार किए जाने की मांग कर रहा है। हमने तालिबान के नेतृत्व वाले अफगानिस्तान के साथ अरबों डॉलर के आर्थिक गलियारे में शामिल होने की संभावना पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों ने भी सीपीईसी में दिलचस्पी दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने सीपीईसी की प्रगति की गति के बारे में फर्जी खबरों और नकारात्मक प्रचार का जिक्र किया और कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजना का दूसरा चरण, पहले से कहीं बड़े स्तर पर होगा।