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Pakistan: इमरान की पार्टी के सदस्य की उम्मीदवारी बहाल, शीर्ष अदालत ने पलटा लाहौर उच्च न्यायालय का फैसला

Sun, 04 Feb 2024 08:13 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने लाहौर उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें पीटीआई के सदस्य की उम्मीदवारी को खारिज कर दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता का नामांकन पत्र खारिज करके कानूनी गलती की है।
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पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पाकिस्तान में आठ फरवरी को संसदीय चुनाव के लिए मतदान होना है। उससे पहले शीर्ष अदालत ने लाहौर उच्च न्यायालय के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के एक सदस्य की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव कानूनों की विवेचना मत के अधिकार के पक्ष में की जानी चाहिए, ताकि मतदाताओं के पास भाविष्य का नेतृत्व चुनने के लिए ज्यादा से ज्यादा विकल्प हों। 

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'डॉन' अखबार की खबर के मुताबिक, "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सदस्य ताहिर सैद की उम्मीदवारी पर शीर्ष अदालत के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की। न्यायमूर्ति सैयद मंसूर अली ने अपने फैसले में लिखा कि चुनाव कानूनों की विवेचना मताधिकार के पक्ष में की जानी चाहिए, जिससे मतदाताओं के पास देश के भावी नेतृत्व का चुनाव करने के लिए ज्यादा विकल्प हों। 

नेशनल असेंबली (एनए) के निर्वाचन क्षेत्र-49 (अटक-1) से पीटीआई के उम्मीदवार ताहिर सैद के नामांकन पत्र को निर्वाचन अधिकारी ने खारिज कर दिया था। उन्होंने इसके पीछे ताहिर सैद के 'घोषित अपराधी' होने का हवाला दिया था। लाहौर उच्च न्यायालय ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले को बरकरार रखा था। जिसे सैद ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि अनुच्छेद 62 और 63 में यह जिक्र नहीं किया गया है कि घोषित अपराधी को संसद का सदस्य होने या चुने जाने से रोका जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्वाचन अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वह घोषित अपराधी की उम्मीदवारी को खारिज करे। 

उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा, "उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता का नामांकन पत्र खारिज करके कानूनी गलती की है।" सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, "रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि याचिकाकर्ता घोषित अपराधी है।"  
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खबर में न्यायमूर्ति शाह के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों के लिए योग्यता और अयोग्यता (संविधान के अनुच्छेद 62 और 63 के तहत) तय करने का मकसद सियासी प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखना है। इसमें कहा गया है कि मानदंड यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं कि सार्वजनिक पद धारण करने वाले व्यक्ति कुछ मानकों को पूरा करें। न्यायमूर्ति शाह ने अदालतों से आग्रह किया कि वह नामांकन पत्रों को उस दृष्टिकोण के साथ स्वीकार या खारिज करें, जो संवैधानिक अधिकारों और मूल्यों में निहित है। 
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