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चीन में पैसा लगाना बना जोखिम: चीनी सरकार के चाबुक से अब भयभीत हैं हांगकांग में मौजूद तमाम बैंक

Fri, 30 Jul 2021 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति अगले 17 से 20 अगस्त तक होने वाली अपनी बैठक में एक ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाली है, जिसके बाद चीन के और भी कई कानून हांगकांग में लागू हो जाएंगे...
 
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चीनी स्टॉक मार्केट - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन में हाई-टेक और शिक्षा क्षेत्र कंपनियों पर सरकार के चल रहे चाबुक से हांगकांग से कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय बैंकों में गहरा डर समा गया है। यहां भय इस बात का है कि चीन सरकार की कार्रवाई के दायरे में हांगकांग भी आया, तो यहां मौजूद बैंक एक बड़ी कानून उलझन में फंस जाएंगे। गौरतलब है कि चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति अगले 17 से 20 अगस्त तक होने वाली अपनी बैठक में एक ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाली है, जिसके बाद चीन के और भी कई कानून हांगकांग में लागू हो जाएंगे।

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हांगकांग दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय बाजारों में एक है। यहां दुनिया के लगभग बड़े बैंकों की शाखाएं हैं, जो हांगकांग और चीन के शेयर बाजारों में निवेश करते रहे हैं। इसलिए चीन में जो रहा है, उसमें उनका बड़ा दांव लगा हुआ है। वेबसाइट एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां सबसे ज्यादा चिंता चीन के प्रस्तावित प्रतिबंध विरोधी कानून को लेकर है। उस कानून में यह प्रावधान है कि अगर कोई देश चीन पर प्रतिबंध लगाता है, तो चीन जवाबी कार्रवाई क्या करेगा। चीन की तरफ से ऐसा कानून बनाने का एलान इस हफ्ते अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन की चीन यात्रा खत्म होने के बाद किया गया। शरमन के साथ वार्ता के दौरान चीन के उप विदेश मंत्री शिये फेंग ने चीन की छवि खराब करने के लिए अमेरिका की तरफ से उठाए गए कदमों की कड़ी आलोचना की थी।

हांगकांग स्थित बैंकों को डर यह है कि नया कानून हांगकांग में भी लागू हुआ, तो उनके सामने चीन या अमेरिका के बीच किसी एक को चुनने की मजबूरी आ जाएगी। यानी वे इन दोनों देशों में से किसी एक के साथ ही कारोबार कर सकेंगे। चीन में बड़ी कंपनियों के खिलाफ बीते एक हफ्ते में उठाए गए कदमों से दुनियाभर के वित्तीय संस्थान चिंतित हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंजों में चीनी कंपनियों के भाव में भारी गिरावट आई है। उधर चीन के अंदर भी शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहा है। इसका असर कई देशों के उन मुचुअल फंडों पर पड़ा है, जिन्होंने चीनी कंपनियों में निवेश कर रखा था। यानी चीन में हुई कार्रवाई का असर दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है। इसका नुकसान उन देशों में मौजूद आम निवेशकों को हो रहा है।

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वैश्विक मीडिया में चीन सरकार के ताजा रुख की कड़ी आलोचना हुई है। जाने-माने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स ने गुरुवार को अपने संपादकीय में लिखा कि चीन में ये कार्रवाई यह दिखाने के लिए की गई है कि वहां सरकार का अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण है। जबकि अमेरिका या यूरोप में ऐसी कार्रवाइयां अकसर उपभोक्ताओँ के हितों की रक्षा करने और बाजार बेहतर ढंग से चले उसे सुनिश्चित करने के लिए की जाती हैं। अखबार ने ध्यान दिलाया है कि चीन सरकार की कार्रवाई सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। बल्कि देश में सबसे बड़ी कृषि कंपनी खड़ी करने वाले अरबपति सुन दावू को 18 साल के लिए जेल भेज दिया गया है। अखबार ने चेतावनी दी है कि इन कार्रवाइयों की चीन को बहुत महंगी कीमत चुकानी होगी।

मशहूर ब्रिटिश पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने अपने संपादकीय में कहा है कि इस कार्रवाई का सबसे बड़ा नुकसान खुद चीन के हाईटेक क्षेत्र को ही होगा। उसने इसे ज्यादा चिंता की बात बताया है कि चीन के अंदर उन कंपनियों पर भी मनमानी कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है, जो हाईटेक क्षेत्र की नहीं हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस हाल में अब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए चीन में पैसा लगाना बहुत जोखिम भरा हो गया है।
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