वैश्विक मीडिया में चीन सरकार के ताजा रुख की कड़ी आलोचना हुई है। जाने-माने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स ने गुरुवार को अपने संपादकीय में लिखा कि चीन में ये कार्रवाई यह दिखाने के लिए की गई है कि वहां सरकार का अर्थव्यवस्था पर पूरा नियंत्रण है। जबकि अमेरिका या यूरोप में ऐसी कार्रवाइयां अकसर उपभोक्ताओँ के हितों की रक्षा करने और बाजार बेहतर ढंग से चले उसे सुनिश्चित करने के लिए की जाती हैं। अखबार ने ध्यान दिलाया है कि चीन सरकार की कार्रवाई सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं हैं। बल्कि देश में सबसे बड़ी कृषि कंपनी खड़ी करने वाले अरबपति सुन दावू को 18 साल के लिए जेल भेज दिया गया है। अखबार ने चेतावनी दी है कि इन कार्रवाइयों की चीन को बहुत महंगी कीमत चुकानी होगी।
मशहूर ब्रिटिश पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने अपने संपादकीय में कहा है कि इस कार्रवाई का सबसे बड़ा नुकसान खुद चीन के हाईटेक क्षेत्र को ही होगा। उसने इसे ज्यादा चिंता की बात बताया है कि चीन के अंदर उन कंपनियों पर भी मनमानी कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है, जो हाईटेक क्षेत्र की नहीं हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस हाल में अब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए चीन में पैसा लगाना बहुत जोखिम भरा हो गया है।