इस सप्ताह रिलीज होने वाली एक नई किताब में दावा किया गया है कि मुंबई हमले के बाद भारत एक विशेष निगरानी समूह का हिस्सा बना। जिसके दम पर भारतीय खुफिया एजेंसियों की ताकत और मजबूत हुई। तकनीकी तौर से मजबूत होने के बाद भारतीय खुफिया एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर में बुरहानी वानी समेत कई आंतकियों को खात्मा किया। एक नई किताब में दावा किया गया कि भारत 26/11 के मुंबई हमलों के बाद एक विशेष निगरानी समूह का सदस्य बना। यह दावा 'स्पाइ स्टोरीज: इनसाइड दि सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ दि रॉ एंड दि आईएसआई' नामक किताब में किया गया है। यह किताब दो पत्रकारों, एड्रियन लेवी और कैथी स्कॉट-क्लार्क ने लिखी है।
नई किताब में दावा किया गया कि एजेंसियों द्वारा थुरया सैटेलाइट फोन पर नजर रखने के लिए एक नई तकनीकी का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद भारतीय खुफिया एजेंसी ने कश्मीर में आतंकवाद का नया चेहरा और हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी को ट्रैक किया और 8 जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया।
पुस्तक में दावा किया गया है कि भारत की खुफिया एजेंसी रॉ को 2008 में यूएस नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) से सिग्नल्स इंटेलिजेंस सीनियर पैसिफिक (SSPAC)नामक एक क्षेत्रीय निकाय संगठन में शामिल होने का निमंत्रण मिला, उसके बाद भारत इसमें शामिल हुआ। इस विशेष निगरानी समूह में पांच देश शामिल हैं, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और थाईलैंड है ।
सएसपीएसी तकनीकी खुफिया जानकारी साझा करने का एक बड़ा मंच
नई किताब में दावा किया गया है कि 26/11 मुंबई हमले की जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) द्वारा पहले ही साझा की गई थी। सीआईए की ओर से सिग्नल्स इंटेलिजेंस सीनियर पैसिफिक (SSPAC) नामक संगठन को 18 विस्तृत रिपोर्ट के अलावा संभावित लक्ष्य, हमलावरों की संख्या के बारे में सूचित कर दिया गया था। भारत भी इस विशेष निगरानी संगठन का हिस्सा था। पत्रकारों ने अपनी किताब में लिखा कि एसएसपीएसी तकनीकी खुफिया जानकारी साझा करने का एक बड़ा मंच है