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अमेरिका: गिर रहा है पढ़ाई का स्तर, ताजा रिपोर्ट ने बढ़ाई जानकारों की चिंता

Sat, 16 Oct 2021 03:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिका के नेशनल असेसमेंट ऑफ एजुकेशन प्रोग्रेस (एनएईपी) की ताजा रिपोर्ट छात्रों की पढ़ सकने की क्षमता और गणित के प्रश्न हल करने की उनकी क्षमता को परखने के लिए हुए अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि 13 साल की उम्र के बच्चों में 2012 से 2020 के बीच इन क्षमताओं में गिरावट आई है...
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अमेरिकी स्कूल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका में पढ़ाई-लिखाई का स्तर गिर रहा है। ये बात अमेरिका के नेशनल असेसमेंट ऑफ एजुकेशन प्रोग्रेस (एनएईपी) की ताजा रिपोर्ट से जाहिर हुई है। ये रिपोर्ट छात्रों की पढ़ सकने की क्षमता और गणित के प्रश्न हल करने की उनकी क्षमता को परखने के लिए हुए अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि 13 साल की उम्र के बच्चों में 2012 से 2020 के बीच इन क्षमताओं में गिरावट आई है।

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न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के मुताबिक एनएईपी की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। उसके बाद से ये पहला मौका है जब इन विषयों में अमेरिकी छात्रों की क्षमता में गिरावट दर्ज हुई है। एनएईपी का मकसद अमेरिकी छात्रों की उपलब्धि के स्तर को परखना है। राष्ट्रीय मूल्यांकन संचालन बोर्ड (नेशनल असेसमेंट गर्वनिंग बोर्ड) की प्रमुख बेवर्ली परड्यू ने रिपोर्ट जारी होने के बाद कहा- ‘ताजा आंकड़ों से यह जाहिर हुआ है कि कोविड-19 महामारी शुरू होने से पहले ही अमेरिकी छात्रों की प्रगति या तो ठहर गई थी या उसमें गिरावट आने लगी थी।’

परड्यू ने कहा है- ‘साफ तौर पर इस अध्ययन के नतीजों को सभी स्तरों पर खतरे की घंटी समझा जाना चाहिए। आगे शिक्षा नीति में बदलाव करते वक्त इन निष्कर्षों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’ अध्ययन के दौरान सामने यह आया कि पढ़ सकने की 13 वर्ष उम्र के छात्रों की क्षमता में तीन अंकों की गिरावट आई है। गणित में 2012 के बाद से पांच अंकों की गिरावट दर्ज हो चुकी है। जबकि नौ वर्ष उम्र के बच्चों में ये दोनों क्षमताएं जस की तस हैं। यानी उन्हें कोई प्रगति नहीं हुई है।

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अध्ययन के दौरान यह भी देखा गया कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले और कमतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के बीच इन दोनों विषयों में फासला बढ़ रहा है। 1980 के दशक से ब्लैक और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) छात्रों की क्षमता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली थी। लेकिन पिछले 2012 के बाद 13 वर्ष उम्र वर्ग में इन्हीं दोनों समुदायों के ही बच्चों की क्षमता में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।

नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स में मूल्यांकन शाखा के सह आयुक्त पेगी जी कार ने कहा है कि ये आंकड़े चिंताजनक हैं। उन्होंने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘मैं वर्षों से इन नतीजों का एलान करता रहा हूं। लेकिन गुजरे दशकों के बीच मैंने कभी ऐसी गिरावट नहीं देखी। गिरावट खास कर कमतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों में देखने को मिली है। ये छात्र इन दोनों विषयों में अब वैसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जैसा वे एक दशक पहले तक कर रहे थे।’

कार के मुताबिक दूसरे विषयों में हुए ऐसे अध्ययनों से भी इसी तरह का पैटर्न उभरा है। असल में कई दूसरे देशों में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला है। उन्होंने कहा- ‘जो हो रहा है उसकी वजह व्यवस्थागत है। ऐसा सभी वर्गों और सभी प्रकार से सैंपलों में देखने को मिल रहा है।’
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