अध्ययन के दौरान यह भी देखा गया कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले और कमतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के बीच इन दोनों विषयों में फासला बढ़ रहा है। 1980 के दशक से ब्लैक और हिस्पैनिक (स्पेनी भाषी) छात्रों की क्षमता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली थी। लेकिन पिछले 2012 के बाद 13 वर्ष उम्र वर्ग में इन्हीं दोनों समुदायों के ही बच्चों की क्षमता में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है।
नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन स्टैटिस्टिक्स में मूल्यांकन शाखा के सह आयुक्त पेगी जी कार ने कहा है कि ये आंकड़े चिंताजनक हैं। उन्होंने वेबसाइट एक्सियोस से कहा- ‘मैं वर्षों से इन नतीजों का एलान करता रहा हूं। लेकिन गुजरे दशकों के बीच मैंने कभी ऐसी गिरावट नहीं देखी। गिरावट खास कर कमतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों में देखने को मिली है। ये छात्र इन दोनों विषयों में अब वैसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जैसा वे एक दशक पहले तक कर रहे थे।’
कार के मुताबिक दूसरे विषयों में हुए ऐसे अध्ययनों से भी इसी तरह का पैटर्न उभरा है। असल में कई दूसरे देशों में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला है। उन्होंने कहा- ‘जो हो रहा है उसकी वजह व्यवस्थागत है। ऐसा सभी वर्गों और सभी प्रकार से सैंपलों में देखने को मिल रहा है।’