संसदीय चुनाव में एलडीपी की जीत तय मानी जा रही है। जापान की राजनीतिक व्यवस्था में चुनावों में ज्यादा अनिश्चय नहीं रहता। बीते 66 साल में लगभग साढ़े 61 साल तक एलडीपी ही सत्ता में रही है। अखबार जापान टाइम्स ने एलडीपी के घोषणापत्र के बारे में छापी अपनी एक रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि पिछले शुक्रवार को किशिदा ने बतौर प्रधानमंत्री चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अपनी पहली बातचीत के दौरान बातचीत के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान पर सहमति जताई थी।
लेकिन पार्टी के घोषणापत्र से उससे अलग संकेत मिला है। एलडीपी ने कहा है कि उसकी अगली सरकार जापान की प्रतिरक्षा संबंधी ताकत बढ़ाएगी। इसके लिए वह इंटरसेप्ट बैलिस्टिक मिसाइलों को ‘दुश्मन के क्षेत्र में’ तैनात करेगी। इसमें चीन विरोधी एक और भावना का परिचय देते हुए कहा गया है कि जापान कॉम्प्रिहेन्सिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांसपैसिफिक पार्टरनरशिप (सीपीटीपीपी) में ताइवान के शामिल होने का स्वागत करता है। गौरतलब है कि पिछले महीने चीन और ताइवान दोनों ने इस संधि की सदस्यता के लिए अर्जी दी। चीन ने ताइवान को सदस्यता देने का विरोध किया है। उसका दावा है कि ताइवान उसका ही प्रदेश है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव घोषणापत्र में दिखा रुख चुनावी जरूरतों की वजह से भी हो सकता है। इसके अलावा मुमकिन है कि चीन के प्रति नरमी की किशिदा की सोच को लेकर पार्टी में गहरा मतभेद हो। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि घोषणापत्र में आर्थिक मामलों में किशिदा की सोच को जगह मिली है। इसमें उन कंपनियों को टैक्स रियायत देने का वादा किया गया है, जो अपने कर्मचारियों के वेतन बढ़ाएंगी।