इस्राइल और हमास के बीच युद्ध सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। गाजा पर हवाई हमलों के बाद इस्राइली रक्षा बल (आईडीएफ) अब ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी में हैं। इसके लिए गाजा की सीमा पर भारी तादाद में टैंक इकट्ठा किए गए हैं। वहीं, शहर के दस लाख से ज्यादा लोगों चौबीस घंटे के भीतर उत्तरी गाजा से दक्षिण में ट्रांसफर करने को कहा गया है। इस बीच, ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने गुरुवार तेल अवीव पर गाजा और लेबनान में सफेद फॉस्फोरस बमों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इस्राइल पर गाजा और लेबनान में सफेद फॉस्फोरस वाले गोला-बारूद का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। संगठन ने कहा कि इससे नागरिकों को गंभीर और दीर्घकालिक चोटों का खतरा है। मंगलवार को एक प्रमुख अमेरिकी समाचार पत्र ने लेबनानी सेना के अधिकारियों के दावों पर आधारित एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। अधिकारियों ने कहा था कि इस्राइल ने लेबनान-इस्राइल सीमा पर तोपखाने से दागे गए बम में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, उस समय इस्राइली सेना के एक प्रवक्ता ने सफेद फॉस्फोरस के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि सैनिकों ने केवल रोशनी वाले फ्लेयर्स छोड़े थे।
एचआरडब्ल्यू ने सफेद फॉस्फोरस पर एक सवाल-जवाब दस्तावेज जारी किया। इसमें कहा गया, इस्राइल द्वारा गाजा और लेबनान में सैन्य अभियानों में सफेद फॉस्फोरस का इस्तेमाल नागरिकों को गंभीर और दीर्घकालिक चोटों के खतरे में डालता है। स्वयंसेवी संगठन ने 10 और 11 अक्तूबर, 2023 को लेबनान और गाजा में बनाए गए वीडियो की पुष्टि की, जिनमें गाजा सिटी पोर्ट और इस्राइल-लेबनान सीमा के साथ दो ग्रामीण स्थानों पर तोपखाने से दागे गए सफेद फॉस्फोरस के कई विस्फोट दिखाई दे रहे हैं। संगठन ने कहा कि गाजा में हमले के बारे में बताने वाले दो लोगों का इंटरव्यू लिया गया है।
सफेद फॉस्फोरस क्या है?
सफेद फॉस्फोरस एक पीला रसायन है, जिससे तीखी गंध आती है। यह एक अत्यधिक ज्वलनशील रसायन है। जो हवा के संपर्क में आने पर तेजी से जलता है। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनियाभर की कई सेना इसका इस्तेमाल आग लगाने वाले उपकरणों में करती है। उदाहरण के लिए, रात में लक्ष्य को साधने के लिए रोशनी करना। इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया से तेज गर्मी (लगभग 800 डिग्री सेल्सियस), प्रकाश और गाढ़ा सफेद धुआं पैदा होता है। सफेद फॉस्फोरस जमीन पर तेजी से फैलता है,जो आग का कारण बनता है। त्वचा और कपड़ों सहित कई सतहों पर तेजी से चिपक जाता है। एक बार चिपकने पर यह बमुश्किल अलग होता है। साफतौर पर यह बेहद घातक रासायनिक पदार्थ है। कई राष्ट्रों ने अपने युद्धों में इसका खासा उपयोग किया है।
सफेद फॉस्फोरस का इतिहास
सबसे पहले सफेद फॉस्फोरस का उपयोग 1800 के दशक में हुआ था। जब आयरिश राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश सेनाओं के खिलाफ इसका उपयोग किया था। आयरिश रिपब्लिकन के उपयोग किए गए फॉर्मूलेशन को 'फेनियन फायर' से जाना जाने लगा। वहीं प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में ब्रिटिश सेना द्वारा इसका इस्तेमाल किया गया। इराक पर अमेरिकी सेना के हमले में विद्रोहियों के खिलाफ इस रासायनिक हथियार का उपयोग किया गया। 2006 में इस्राइल ने लेबनान युद्ध के दौरान हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई में फॉस्फोरस के इस्तेमाल की बात को मानी थी। बशर अल-असद के नेतृत्व वाली सीरियाई सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के एक बड़े वर्ग द्वारा सीरियाई संकट के दौरान सफेद फास्फोरस सहित रासायनिक हथियारों का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था। यूक्रेन-रुस युद्ध में भी कथित तौर पर इसके इस्तेमाल की बात सामने आई थी।