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Al-Aqsa Mosque: क्या इस्राइल पर हमास के ताबड़तोड़ हमले का कारण अल-अक्सा? जानिए इसका तीन धर्मों से जुड़ा इतिहास

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, येरुशलम Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 08 Oct 2023 08:38 PM IST

सार

Israel Hamas War Al-Aqsa Mosque History: मूल रूप से यहूदियों और इसाइयों की धरती के रुप में जाना जाने वाला इस्राइल मुस्लिमों के लिए भी बेहद खास महत्व रखता है। हमास के हमले का एक कारण अल अक्सा मस्जिद को भी माना जा रहा है, जानिए इस बड़े धार्मिक केंद्र जुड़ी कुछ प्रमुख बातें
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al-aqsa mosque israel - फोटो : ANI


हमास ने हमले को बताया- ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड

दरअसल, शनिवार को गाजा पट्टी से इस्राइल में 5,000 से अधिक रॉकेट दागे गए। केवल 20 मिनट में हुए इस अंधाधुंध हमले के बाद आतंकी संगठन हमास के सशस्त्र विंग ने 'ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड' की शुरुआत बताया। इस्राइली सेना की तरफ से जवाबी हवाई हमलों में हमास के 400 से अधिक आतंकियों को मारने का दावा किया गया है। 1900 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। फिलिस्तीन ने भी 200 से अधिक लोगों की मौत की बात कही है। हिंसा और रक्तपात के बीच जानना काफी अहम है कि टकराव का प्रमुख कारण क्या है।


ऑपरेशन का नाम अल-अक्सा फ्लड क्यों रखा गया है?

भौगोलिक नजरिए से देखें तो अल-अक्सा पुराने येरूशलम के बीच में एक पहाड़ी पर स्थित है। यहूदी धर्मावलंबी आस्था के इस बड़े केंद्र को टेम्पल माउंट के रूप में जानते हैं। मुस्लिम अल-हरम अल-शरीफ या नोबल सैंक्चुअरी के रूप में जानते हैं। हमास ने हमलों के बाद कहा कि गाजा पट्टी से फ्लड यानी बाढ़ की शुरुआत हुई है, लेकिन जल्द ही हमास के लोग इस्राइल के पश्चिम तट के साथ-साथ हर उस जगह जाएंगे जहां लड़ाई लड़ी जानी है। अंधाधुंध हमलों के कारण इस ऑपरेशन को हमास ने मस्जिद के नाम से जोड़ते हुए फ्लड यानी बाढ़ जैसा दिखाने की कोशिश की है।


8वीं शताब्दी में निर्माण, इस्लामिक आस्था का केंद्र क्यों?

मुस्लिम धर्मावलंबियों के बीच अल अक्सा मक्का और मदीना के बाद इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। अल-अक्सा पूरे परिसर को दिया गया नाम है। इस्लाम पर ईमान रखने वाले लोगों के बीच अल- अक्सा दो पवित्र स्थानों के कारण आस्था का केंद्र है। एक का नाम डोम ऑफ द रॉक है और परिसर के दूसरे केंद्र को अल-अक्सा मस्जिद या किबली मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकारों और धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस मस्जिद और परिसर को 8वीं शताब्दी AD (ईसा मसीह के बाद) में बनाया गया था।


तीन हजार साल पहले मंदिर का निर्माण, दो बार तोड़ा गया मंदिर

परिसर पश्चिमी दीवार की तरफ है। ये यहूदियों के बीच प्रार्थना के एक पवित्र स्थान के रूप में जाना जाता है। इन लोगों के लिए टेम्पल माउंट उनका सबसे पवित्र स्थल है। यहूदियों का मानना है कि बाइबिल में जिस राजा सोलोमन का जिक्र है उन्होंने तीन हजार साल पहले मंदिर का निर्माण कराया था, लेकिन बाद में रोमन साम्राज्य में मंदिर तोड़ दिया गया। यहूदी आस्था के अनुसार, तीन हजार साल पहले पहला मंदिर बना। बाद के वर्षों में दूसरे मंदिर का निर्माण कराए जाने का उल्लेख भी मिलता है, लेकिन इसकी टाइमलाइन के बारे में इतिहासकारों के बीच ठोस राय नहीं है। यहूदियों का मानना है कि दूसरा मंदिर 70 ई. में रोमन साम्राज्य में तोड़ दिया गया।


सूली पर चढ़ाने के बाद यहीं हुआ ईसा का पुनर्जन्म

ईसाई धर्म के मानने वाले लोगों की मान्यता है कि अल-अक्सा परिसर में ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इसी परिसर में दोबारा जन्म की भी आस्था है। इसी स्थान पर चर्च बनाया गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। हालांकि, हिंसक घटनाओं के कारण आस्था के ये केंद्र नकारात्मक घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहते हैं।


56 साल पहले इस्राइल का बल प्रयोग, अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं

मध्य पूर्व में हुए युद्ध के बाद इस्राइल ने 1967 में इस जगह पर कब्जा कर लिया। इस्राइल ने बल प्रयोग कर अल अक्सा को पूर्वी येरुशलम के बाकी हिस्सों और वेस्ट बैंक के आसपास के हिस्सों के साथ मिला दिया। हालांकि, इस भौगोलिक हकीकत के बारे में एक और बात जानना बेहद अहम है कि  फिलिस्तीन और वेस्ट बैंक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है।
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अल-अक्सा ही टकराव का मुद्दा क्यों बना?

दरअसल, अल-अक्सा परिसर लंबे समय से येरूशलम में संप्रभुता और धर्म के मामलों के कारण हिंसा का साक्षी बनता रहा है। लंबे समय तक "यथास्थिति" बरकरार रखने की व्यवस्था के तहत क्षेत्र पर शासन किया गया। इस्राइल का कहना है कि वह भौगोलिक सीमाओं या अल-अक्सा परिसर से जुड़े नियमों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करता। नियमों के अनुसार, अल-अक्सा परिसर में गैर-मुस्लिमों के जाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन मस्जिद परिसर में नमाज अदा करने या किसी भी तरह के धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति केवल मुसलमानों को दी गई है।


27 साल पहले सुरंग का विरोध, झड़प में 80 से अधिक मौतें

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल-अक्सा आने वाले यहूदी धर्मावलंबी नियमों की खुलेआम अवहेलना करते हैं। इस्राइल पर परिसर में कमोबेश खुले तौर पर प्रार्थना करने वाले यहूदी और इस्लाम मानने वाले लोगों के बीच भेदभाव के गंभीर आरोप लगे हैं। मुस्लिमों पर लगाए गए कथित प्रतिबंध और अल-अक्सा परिसर में उनकी पहुंच पर इस्राइली प्रतिबंधों के कारण विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़कने की बात सामने आई है। 1996 में, अल-अक्सा मस्जिद परिसर के पास एक नई सुरंग का उद्घाटन किए जाने की बात भी सामने आई। फिलिस्तीनी जनता ने इस पहल को धार्मिक रूप से पवित्र जगह को अपवित्र करने के रूप में देखा। हिंसक झड़प में तीन दिनों में 80 से अधिक लोग मारे गए थे।


खुफिया चूक के कारण हमास का हमला सफल रहा?

इस्राइल की पुलिस जब अल-अक्सा मस्जिद में घुसी तो इस्लाम मानने वाले लोगों की आस्था आहत हुई। हमास इस्राइल को दुनिया के नक्शे से मिटाना चाहता है। खुद को इस्लामिक संगठन और धर्म के पैरोकार बताने वाले संगठन हमास की हरकतों और बयानों में विरोधाभास दिखता है। अप्रैल, 2023 में अल-अक्सा में हुई झड़प के बाद हमास का उग्र तेवर इस बात का संकेत था कि धर्म के नाम पर बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। खुफिया जानकारी के लिए इस्राइली एजेंसी- मोसाद दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन खुद इस्राइल में हुए हमले से सतर्क होने में इस्राइली खुफिया अधिकारी चूक गए। देश की सुरक्षा परिषद की पूर्व निदेशक हेलिट बरेल ने भी खुफिया चूक की तरफ इशारा किया है।


कुछ अहम बातों पर बिंदुवार नजरें-
  • अल-अक्सा परिसर के भीतर 'द होली ऑफ द होलीज' नाम की जगह यहूदी आस्था का बड़ा केंद्र
  • सबसे पवित्र स्थान के तौर पर देखने वाले यहूदियों की आस्था है कि इसी जगह से दुनिया की शुरुआत हुई थी
  • इस्लामिक कैलेंडर हिजरी के मुताबिक सन 621 में अल अक्सा मस्जिद से ही पैगंबर मोहम्मद ने जन्नत तक का सफर तय किया
  • इस्लामिक धर्मावलंबियों की मान्यता- इस मस्जिद में आखिरी पैगंबर- पैगंबर मोहम्मद ने अपने से पहले जन्म लेने वाले सभी पैगंबरों के साथ नमाज अदा की
  • माना जाता है कि दुनियाभर के मुसलमान पहले अल-अक्सा की तरफ चेहरा कर नमाज अदा करते थे।
  • बाद में मक्का-मदीना की दिशा में नमाज अदा की जाने लगी। आज भी नमाज अदा करते समय भारत के पश्चिम दिशा में चेहरा रखने की परंपरा है।
दो एकड़ के परिसर में तीन पंथों की आस्था के केंद्र 

धार्मिक हिंसा की घटनाओं पर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुसलमानों के एक धड़े पर येरुशलम पर हमले और कब्जे का आरोप है। हिंसा की ये घटना पैगंबर मोहम्मद के इंतकाल के महज चार साल बाद हुई। परिसर में सुनहरे रंग के गुंबद वाली इमारत को डोम ऑफ रॉक कहा जाता है। 


राजनेताओं के दौरे से भड़के फिलिस्तीनी

साल 2000 में इस्राइली राजनेता एरियल शेरोन तत्कालीन विपक्षी नेता के तौर पर सक्रिय थे। उन्होंने टेंपल माउंट/अल-हरम अल-शरीफ परिसर का दौरा करने वाले इस्राइली सांसदों के एक समूह का नेतृत्व किया था। इसका फिलिस्तीनियों ने पुरजोर विरोध किया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखने वाले जानकारों के अनुसार इस्राइली प्रतिनिधिमंडल के दौरे से आक्रोशित फिलिस्तीनी जनता ने हिंसक झड़पें शुरू कीं। हिंसक टकराव तेजी से दूसरे फिलिस्तीनी विद्रोह में बदला, जिसे अल-अक्सा इंतिफादा के नाम से भी जाना जाता है।


जाहिर हो रही है दबी हुई कुंठा, गुस्से का इजहार

2021 में भी अल-अक्सा में झड़प हुई। इसके बाद गाजा के साथ 10 दिनों का चला युद्ध शुरू हुआ था। आस्था का अहम केंद्र अल-अक्सा मस्जिद परिसर तीन धर्मों के लोगों से जुड़ी धार्मिक आस्था के कारण एक ऐसी जगह है जहां मामूली घटना भी चिंगारी का काम कर सकती है। सभी प्रमुख फिलिस्तीनी विद्रोह अल-अक्सा से ही शुरू हुए हैं। हिंसा और उसके बैकग्राउंड को देखते हुए विदेश मामलों के जानकारों का मानना है कि धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व के अलावा, अल-अक्सा वर्षों से दबी हुई कुंठाओं और गुस्से के जाहिर होने का केंद्र भी बनता जा रहा है।


हमास का बयान- ज्यादती का बदला ले रहे

शायद इसलिए हमास जैसा सशस्र संगठन धर्म के नाम पर हिंसा को भी उचित ठहराने की हिमाकत कर रहा है। इस्राइल इसे आतंकी संगठन मानता है, जबकि हमास के बड़े नेता इस्माल हानियेह अल-अक्सा को बचाने की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस्माइल का कहना है कि उनका संगठन वेस्ट बैंक पर कब्जा और उनके समुदाय के साथ हुई ज्यादती का बदला ले रहा है। 8वीं शताब्दी के इस केंद्र के बारे में माना जाता है कि 20वीं सदी में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण हालात और भी संवेदनशील हो गए।


मस्जिद में बल प्रयोग से आहत हुई आस्था

इस्राइल की पुलिस का आरोप था कि अप्रैल, 2023 में कुछ असामाजिक तत्व मास्क लगाकर मस्जिद में छिपने घुसे हैं। लाठी, पटाखे और पत्थरों से लैस उपद्रवियों पर कार्रवाई करने की बात कहते हुए पुलिस परिसर में घुसी। पुलिस की कार्रवाई और मस्जिद के अंदर मौजूद लोगों के टकराव के बीच वहां तोड़फोड़ के आरोप भी लगे। रबर बुलेट का सहारा लेने वाली इस्राइली पुलिस की कार्रवाई में 40 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। माना जा रहा है कि अल-अक्सा की गरिमा बचाने का दावा कर रहे संगठन हमास ने इसका बदला लिया है। इस्राइल-फिलिस्तीन टकराव के इतिहास पर नजर रखने वाले कई तबकों का मानना है कि अल-अक्सा में इस्राइली पुलिस के बल प्रयोग के समय से ही हमास के हमलों का खतरा मंडरा रहा था। 
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