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Hottest Year: करीब 1.20 लाख साल में 2023 सबसे गर्म, तुर्किये में भूकंप व अफ्रीका में बाढ़ जैसी आपदाएं भी बढ़ीं

Sat, 30 Dec 2023 05:01 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क

सार

लगातार अपनाए जा रहे वैज्ञानिक संसाधनों का प्रकृति पर खराब असर पड़ रहा है। साल 2023 अंतिम पड़ाव पर है। वैज्ञानिकों के अनुसार, एक बार फिर यह साल इतिहास में सबसे गर्म साबित हुआ है। पेरिस समझौते जैसी वैश्विक पहल के बावजूद लगातार बढ़ते तापमान को पूरी मानवता की नाकामी माना जा रहा है।
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जलवायु परिवर्तन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गीतकार प्रदीप की लेखनी से निकला सदाबहार नगमा 'देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान...' का संदर्भ फिल्म के अनुसार भले ही कुछ और हो, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन पर भी सटीक माना जा सकता है। 69 साल पहले साल 1954 में आई फिल्म नास्तिक का यह गाना इसलिए भी मौजूं है क्योंकि पर्यावरण का अभूतपूर्व नुकसान हो रहा है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण पेशानी पर बल पड़ रहे हैं, लेकिन दुनियाभर में उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। एक बार फिर साल 2023 का वैश्विक तापमान सबसे अधिक रहा है।
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मानवता की सामूहिक नाकामी
धरती जलवायु परिवर्तन के कारण कराह रही है। एक शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने कहा है कि साल 2023 इतिहास में सबसे गर्म वर्ष साबित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि रिकॉर्ड तापमान के साथ-साथ जंगल की आग और भूकंप-बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा दिखाती है कि पूरी मानवता सामूहिक रूप से विफल हुई है। 

भूकंप-बाढ़ जंगल की आग जैसी घटनाओं में उछाल
नाकामियों को उजागर करते मंजर के संबंध में वैज्ञानिक जेम्स हेन्सन ने कहा, बढ़ते जलवायु संकट से निपटने की दिशा में हो रहे प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। 2023 में दुनिया कई प्राकृतिक आपदाओं की साक्षी बनी। तुर्किये-सीरिया का विनाशकारी भूकंप हो या दक्षिण अफ्रीका में बाढ़, पूरे साल की समीक्षा करने पर ऐसी घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
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व्यापक विनाश, विस्थापन और जान-माल का नुकसान
वैज्ञानिकों ने साल के एक अन्य बड़े हादसे में पूर्वी अफ्रीकी देश अल्जीरिया में जंगल की आग को भी गिना है। इसके अलावा इस साल देश-दुनिया के कई हिस्सों को चक्रवात की मार भी झेलनी पड़ी। वैश्विक स्तर पर व्यापक विनाश, विस्थापन और जान-माल का नुकसान हुआ। जलवायु वैज्ञानिक जेम्स हेन्सन का मानना है कि साल 2023 को महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि त्रासदी के बीच सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पूरी मानवता की असफलता भी उजागर हुई है।


2023 आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद अहम मोड़
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक हेन्सन ने कहा, जब हमारे बच्चे और पोते-पोतियां मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन का इतिहास देखेंगे, तो इस वर्ष और अगले वर्ष को एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में सरकारी उपायों की निरर्थकता और नीतियों की विफलता भी साफ तौर पर उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि सरकारें ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में विफल रहीं। ग्लोबल वार्मिंग की दर इतिहास में सबसे तेज हो चुकी है।

1.20 लाख वर्षों में सबसे अधिक तापमान
हेन्सन ने सख्त चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि दुनिया 'नई जलवायु सीमा' की राह पर है। इसमें तापमान पिछले 10 लाख वर्षों में दर्ज किसी भी तापमान से अधिक होगा। उन्होंने कहा कि 2023 की चिलचिलाती गर्मी (जुलाई) में विगत लगभग 1.20 लाख वर्षों में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। हेन्सन न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय के अर्थ इंस्टीट्यूट में जलवायु कार्यक्रम के निदेशक हैं। उन्होंने कहा कि विपरित हालात के बावजूद, उम्मीद की एकमात्र किरण नेतृत्व का पीढ़ीगत बदलाव है।

विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक चेतावनियों की अनदेखी पर चिंता जताई
उन्होंने कहा, बेहद कठिन हालात और संघर्ष के बीच सकारात्मक पक्ष यह है कि युवाओं को अपने भविष्य की जिम्मेदारी संभालने का एहसास हो। राजनीतिक अस्थिरता अवसर प्रदान कर सकती है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक कई अन्य विशेषज्ञों ने भी वैज्ञानिक चेतावनियों की अनदेखी और तत्परता से होने वाली राजनीतिक कार्रवाई के बीच व्यापक अंतर पर निराशा व्यक्त की।
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UN के मंच पर भी ग्लोबल वॉर्मिंग की अनदेखी चिंताजनक
चिंताजनक तस्वीर का एक पहलू हाल ही में संयुक्त राष्ट्र कॉप28 शिखर सम्मेलन (COP28 Dubai) में भी देखने को मिला। पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए यूएन की इस वैश्विक पहल में जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए स्पष्ट आह्वान नहीं किया जाना, बेहद खतरनाक ट्रेंड है। जानकारों के अनुसार, लगभग 30 वर्षों तक ग्लोबल वार्मिंग का दोष जीवाश्म ईंधन पर मढ़ा गया, लेकिन तापमान बढ़ने के सबूतों के बावजूद ठोस पहल नहीं की गई।
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