पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
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इस्राइल और हमास के बीच 7 अक्तूबर, 2023 को शुरू हुआ युद्ध अभी भी जारी है। ये जंग रुकी नहीं लेकिन अब इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच भीषण जंग छिड़ गई है और दोनों ओर से हमले किए जा रहे हैं। पिछले दिनों लेबनान में हुए इस्राइली हमलों में हिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरल्ला की मौत हो गई। हिजबुल्ला समेत कई सशस्त्र समूहों ने इस्राइल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही हमास के समर्थन में हमले किए हैं। इन समूहों के हमले के जवाब में इस्राइल भी लगातार कार्रवाई कर रहा है। उधर अमेरिका ने भी मित्र देशों के सेनाओं के साथ मिलकर सीरिया और यमन में सशस्त्र समूहों के अड्डों को निशाना बनाया है।
यह संघर्ष ऐसे समय हो रहा है जब विश्वभर के नेता न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। उन्हें यह आशंका है कि यह संघर्ष और अधिक बढ़ सकता है और इसमें कई देश भी शामिल हो सकते हैं। आइये समझते हैं कि आखिर पश्चिम एशिया में युद्ध के कितने मोर्च खुले हुए हैं?
इस्राइल और हमास
हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल की अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए इसके इलाकों में हमला किया था। इस हमले में करीब 1200 इस्राइलियों की जानें गई थीं और 5000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस दौरान हमास लड़ाके 240 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले गए थे। इन बंधकों में से कई लोगों को छुड़ा लिया गया है हालांकि, दर्जनों लोग अभी भी गाजा में बंधक हैं। वहीं, इस्राइल के जवाबी हमलों में 40,000 से ज्यादा फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। गाजा के 24 लाख लोगों में से 20 लाख से ज्यादा को अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं, उनमें आधे बच्चे शामिल हैं।
इस्राइल और हमास युद्ध में हमास को उस वक्त हमास बड़ा झटका लगा जब 31 जुलाई को इसके राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की हत्या कर दी गई। 31 जुलाई को हमास प्रमुख इस्माइल हनिया ईरान की राजधानी तेहरान में मारा गया। हानिया ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचा था। पेजेशकियन के शपथ समारोह में 50 से अधिक देशों के नेता पहुंचे थे। इन नेताओं में भारत के केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल थे।
7 अक्तूबर, 2023 के हमले के बाद इस्राइल ने हमास को जड़ से मिटाने का संकल्प लिया था। इसके लिए इस्राइली सेना ने गाजा में हवाई और जमीनी हमले किए। इस तरह से हमास और इस्राइल के बीच बीते करीब एक साल से खूनी जंग जारी है। हालांकि, कई देशों के प्रयास से दोनों पक्षों में युद्धविराम को लेकर बात भी हुई है, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
इस्राइल और हिजबुल्ला
पिछले साल 7 अक्टूबर को इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ही हिजबुल्ला ने सीमा पर इस्राइली सैन्य चौकियों पर हमला करना शुरू कर दिया। हिजबुल्ला ने हमास का समर्थन करने के लिए 8 अक्तूबर को इस्राइल पर रॉकेट दागना शुरू कर दिया। तब से इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच गोलीबारी जारी है। इस्राइली सेना लगातार हमलों से हिजबुल्ला इस्राइल-लेबनान सीमा से और पीछे हटाना चाहती है। फिलहाल, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। हिजबुल्ला ने कहा है कि वह तब तक अपने हमले जारी रखेगा जब तक कि इस्राइल और हमास के बीच गाजा में युद्ध विराम पर सहमति नहीं बन जाती। जवाबी कार्रवाई में इस्राइल ने हिजबुल्ला के कई कमांडरों को ढेर कर दिया है। 27 सितंबर को इस्राइली सेना ने हिजबुल्ला के प्रमुख हसन नसरल्ला को मार गिराया।
इस्राइल और ईरान
इस्राइल और हमास के युद्ध के बाद कई बार ईरान और इस्राइल आमने-सामने आए। इस तनाव की शुरुआत 1 अप्रैल 2024 को हुई। जब सीरिया स्थित ईरानी दूतावास पर हवाई हमला हुआ। इस हमले में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अल-कुद्स बल के एक वरिष्ठ कमांडर सहित कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। ये सभी दमिश्क दूतावास परिसर में एक बैठक में भाग ले रहे थे। हमले का आरोप इस्राइल पर लगाया गया। इसके बाद 13 अप्रैल को ईरानी सेना ने प्रॉक्सी नेटवर्क के साथ मिलकर इस्राइल और इस्राइल के कब्जे वाले गोलान हाइट्स पर जवाबी हमले किए। इस हमले को ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस नाम दिया था। इस हमले को इजरायल-हमास युद्ध के परिणाम के रूप में देखा गया और यह ईरान द्वारा इस्राइल पर उसके प्रॉक्सी संघर्ष की शुरुआत के बाद से पहला सीधा हमला था। इस्राइल ने कहा कि 99 प्रतिशत हथियारों को नष्ट कर दिया और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।
अब हिजबुल्ला प्रमुख नसरल्ला की मौत के बाद एक बार फिर ईरान ने इस्राइल पर हमले की चेतावनी दी है।
इस्राइल-सीरिया
हमास के साथ युद्ध शुरू होने के बाद इस्राइली सेना सीरिया में भी हमले कर रही है। गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही उसने इस्राइल ने हमले तेज कर दिए हैं और सीरिया में ईरान और उसके सहयोगी हिजबुल्ला को खुलेआम निशाना बनाया है। इस्राइली सेना ने विशेष रूप से राजधानी दमिश्क के आसपास हमले किए हैं जहां हिजबुल्ला की उपस्थिति अधिक मजबूत है। कहा जाता है कि सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार को वर्षों से ईरान का समर्थन प्राप्त है। देश के विभिन्न हिस्सों पर विभिन्न गुटों का नियंत्रण है।
इस्राइल-इराक
हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्ला की हत्या के बाद इराक के सशस्त्र समूह अल-वलाई ने इस्राइल पर हमले की धमकी दी है। इसने लेबनान या इसकी सीमाओं पर इस्राइली सेना के विरुद्ध लड़ाई में शामिल होने के लिए अपने लोगों को भेजने की बात कही है। अब तक इराक के शिया समूह ने इस्राइल के विरुद्ध सीमित हमले किए हैं जिसका इस्राइली सेना ने भी जवाब दिया है।
इस्राइल-यमन
पिछले दो दिनों में हूती विद्रोहियों द्वारा इस्राइल पर मिसाइलें दागे जाने के बाद इस्राइल की सेना ने 29 सितंबर 2024 को यमन में हूती ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष के एक और मोर्चा खुल गया। इस्राइल का दावा है कि पिछले एक साल से हूती ईरान के निर्देश और वित्तपोषण के तहत और इराकी सशस्त्र समूह के सहयोग से इस्राइल पर हमला कर रहा है।
लाल सागर संकट
पिछले साल 19 अक्तूबर से लाल सागर में संकट चल रहा है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गाजा पट्टी पर युद्ध को समाप्त करने की मांग करते हुए इस्राइल पर मिसाइलों और सशस्त्र ड्रोनों को लॉन्च किया। हूती विद्रोहियों ने तब से लाल सागर में दर्जनों व्यापारी और नौसैनिक जहाजों पर कब्जा कर लिया और उन पर हवाई हमले किए हैं। इसके कारण इस्राइल, अमेरिका और सहयोगी बलों ने जवाब में सैकड़ों हवाई हमले किए गए हैं। इसी साल अप्रैल में रूस से भारत जा रहे एक तेल टैंकर पर यमन के हूती ने लाल सागर में मिसाइलों से हमला किया था। उनकी मिसाइलों ने लाल सागर में एंड्रोमेडा स्टार तेल टैंकर को निशाना बनाया था।
सीरिया में अमेरिकी हमले
हाल में सीरिया में अमेरिका ने हवाई हमला किया। इसमें इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा से जुड़े 37 आतंकी मारे गए। अमेरिका की सेना ने दावा किया कि आतंकियों के कई ठिकानों पर हमले किए गए। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक अमेरिका ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया पर हमला किया। इसमें अल-कायदा से जुड़े हुर्रस अल-दीन समूह के शीर्ष नेता और आठ अन्य को निशाना बनाया गया। इन आतंकियों पर सैन्य अभियानों की निगरानी का जिम्मा था। इसके साथ ही मध्य सीरिया में आईएस के प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया गया। इसमें 28 आतंकी मारे गए। इनमें चार सीरियाई नेता शामिल थे।
अमेरिकी सेना के मुताबिक हवाई हमले के जरिये अमेरिकी हितों के साथ-साथ हमारे सहयोगियों और साझेदारों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने की आईएसआईएस की तैयारी को ध्वस्त किया गया। सीरिया में लगभग 900 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका की सेना पूर्वोत्तर सीरिया में अपने प्रमुख सहयोगियों कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज को सहायता देती हैं।