दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने पहली बार यह स्वीकार किया कि अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के भीतर मतभेदों के कारण देश में घोटाले में कथित तौर पर लिप्त गुप्ता परिवार के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं हो सकी है।
सरकारी संस्थानों और प्रांतीय सरकार में अरबों रैंड (स्थानीय मुद्रा) के गबन के आरोपी तीन गुप्ता बंधुओं का जिक्र करते हुए रामाफोसा ने कहा, उनकी स्वीकार्यता पूरे सरकारी तंत्र में थी, उनकी पहुंच हर जगह थी।
जांच आयोग के समक्ष गवाही में रामाफोसा ने कहा कि पार्टी के कुछ सदस्यों ने पार्टी को इन संबंधों के बारे में आगाह किया था। उन्होंने कहा, आगाह किया गया था और चौकन्ना होने की जरूरत थी। लेकिन मेरे खयाल से गुप्ता परिवार के मामले में हमारी आंखों पर पट्टी बंध गई थी क्योंकि हमें लगता था कि वे हमारी पार्टी के सर्वोच्च नेता के मित्र हैं।
रामाफोसा ने बताया कि परिवहन मंत्री फिकिले एमबौला ने कई बार इस बारे में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में बताया था। कई अन्य पूर्व मंत्रियों ने भी आयोग के समक्ष गवाही दी है। बता दें कि अजय, अतुल और राजेश गुप्ता 1994 में अपने परिवारों के साथ दक्षिण अफ्रीका आ गए थे।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई
रामाफोसा ने उस घटना का जिक्र भी किया जब गुप्ता परिवार के यहां विवाह समारोह में शामिल होने भारत से मेहमानों को लेकर आया विमान वायुसेना के वॉटरक्लूफ ठिकाने पर उतरा था। गुप्ता परिवार कथित तौर पर दुबई में आत्म निर्वासन में है और दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों ने उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि वे यहां आपराधिक आरोपों का सामना कर सकें।