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जर्मनी में आम चुनाव: आखिर कितनी लाल होगी अगली लेफ्ट सरकार?

Tue, 21 Sep 2021 05:07 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन

सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर चुनाव नतीजे जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक ही आए, तो शोल्ज चांसलर बनेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें एक से ज्यादा पार्टियों के साथ गठबंधन बनाना होगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
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जर्मनी में आम चुनाव के लिए मतदान में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। इस बीच रविवार को होने वाले मतदान के बाद मौजूदा चांसलर एंजेला मर्केल की पार्टी के हाथ से सत्ता निकलने की संभावना लगातार मजबूत हो रही है। मर्केल की क्रिश्चिय डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पार्टी पिछले 16 साल से लगातार सत्ता में है।

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रविवार रात चांसलर पद के प्रमुख दावेदारों के बीच टीवी पर हुई बहस के बाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी) के नेता ओलाफ शोल्ज की लोकप्रियता में और बढ़ोतरी हुई है। मीडिया आकलनों में आम तौर पर यही समझ बनी है कि बहस के दौरान सीडीयू के नेता अरमिन लैशेट का प्रदर्शन कमजोर रहा। शोल्ज, मर्केल की पिछली गठबंधन सरकार में वित्त मंत्री थे। उसके पहले वे हैमबर्ग शहर के मेयर रह चुके हैं।

तीसरी बहस के बाद जारी हुए जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक एसपीडी को बुंडेस्टैग (जर्मन संसद) के चुनाव में 26 फीसदी वोट मिलने की संभावना है। एसपीडी को 21 और ग्रीन पार्टी को 16 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। मुक्त बाजार समर्थक फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी को 11 फीसदी, धुर दक्षिणपंथी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) को 11 फीसदी और लेफ्ट पार्टी को छह फीसदी वोट मिलने की संभावना बताई गई है।
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वेबसाइट पॉलिटिको डॉट ईयू की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिक संभावना इस बात की है कि एसपीडी ग्रीन और लेफ्ट पार्टी के साथ गठजोड़ करेगी। अगर ऐसा हुआ, तो जर्मनी में दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे अधिक वामपंथी रुझान वाली सरकार बनेगी। एसपीडी को ऐसा गठबंधन बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण और जन कल्याण कार्यक्रमों के ग्रीन और लेफ्ट पार्टी के एजेंडों पर सहमत होना होगा।

इन अनुमानों के बीच लेफ्ट पार्टी के नेता ग्रेगॉर गायसी मीडिया की चर्चा में आ गए हैं। गायसी पिछले तीन दशक से लगातार जर्मनी की सत्ताधारी पार्टियों की कड़ी आलोचना करते रहे हैं। वे कम्युनिस्ट हैं। उनकी पार्टी का ज्यादा आधार उन इलाकों में है, जो पहले जर्मन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (पूर्वी जर्मनी) का हिस्सा थे। गायसी ने पॉलिटिको डॉट ईयू को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि एसपीडी नव-उदारवाद की राजनीति से निकलने और अपने मौजूदा गठबंधन से बाहर आने का रास्ता ढूंढ सकेगी।’

लेफ्ट पार्टी के एजेंडे में जर्मनी को नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) से बाहर निकालना और अमेरिका जर्मनी से अपने परमाणु हथियार हटाने के लिए मजबूर करना शामिल है। विश्लेषकों का कहना है कि इन मुद्दों पर उसका सख्त रुख चुनाव के बाद गठबंधन बनाने में रुकावट बन सकता है। एसपीडी और ग्रीन पार्टियों के नेता कह चुके हैं कि अगर लेफ्ट पार्टी उनके साथ गठबंधन बनाना चाहती है, तो विदेश नीति संबंधी अपनी मांगों को उसे वापस लेना होगा।

लेकिन गायसी ने वेबसाइट पोलिटिको से दो टूक कहा, ‘अगर एसपीडी और ग्रीन पार्टी जर्मनी में परमाणु हथियार बनाए रखना चाहती हैं, तो फिर उनके साथ कोई गठबंधन नहीं बन सकता।’ सीडीयू लेफ्ट पार्टी के इस रुख की कड़ी आलोचक रही है। उसने इस पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर एसपीडी से कठिन सवाल पूछे हैं। लेकिन ओलाफ शोल्ज ने कहा है कि चुनाव के बाद बनने वाले गठबंधन को लेकर उन्होंने सारी संभावनाएं खुली रखी हैं।

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