अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से ऑकस समझौते के बाद पहली बार आमने-सामने हुई मुलाकात में माना कि अमेरिका ने इस समझौते के दौरान नासमझी बरती। बाइडन ने कहा, हमने जो किया वह नासमझी भरा था। मैं यह मानकर चल रहा था कि फ्रांस को इस बारे में पहले से जानकारी दे दी गई थी।
ऑकस समझौते के चलते फ्रांस को ऑस्ट्रेलिया के साथ हुई 37 अरब डॉलर के सौदे से हाथ धोना पड़ा और बाद में दोनों पारंपरिक रूप से मित्र देशों में तनाव देखने को मिला था। बाइडन-मैक्रों के बीच हुई ये बैठक रोम में होने वाले जी-20 और ग्लासगो में सीओपी-26 समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति की दुनिया के तमाम नेताओं से होने वाली बैठकों में से एक थी।
बाइडन ने इस दौरान यह भी कहा कि फ्रांस हमारा मित्र देश है और उसके साथ साझेदारी खत्म नहीं की जा सकती है। उम्मीद है कि बाइडन अब अफ्रीका के सालेह क्षेत्र में फ्रांस के आतंकवाद रोधी अभियानों को अपना समर्थन देंगे ताकि उसकी नाराजी दूर हो सके। फ्रांस चाहता है कि उस क्षेत्र में अमेरिका खुफिया और सैन्य सहयोग बढ़ाए। दोनों नेताओं में हिंद-प्रशांत में सहयोग के नए तरीकों और अफगानिस्तान व ईरान मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
यूरोपीय नेताओं से ईरान के एटमी समझौते पर बात करेंगे बाइडन
ईरान के एटमी कार्यक्रम को लेकर जारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन यूरोपीय सहयोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं। यूरोपीय नेता एक कूटनीतिक समाधान और ईरान के वार्ता की मेज पर लौटने से इनकार करने की आशंका को देखते हुए योजना बनाने पर जोर दे रहे हैं।
जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटिश नेताओं के साथ यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान अपने यूरेनियम का संवर्धन लगातार बढ़ा रहा है। बाइडन 2015 के परमाणु समझौते को बहाल करने और ईरान को समझौते के अनुपालन के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं।