राफेल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि एक बार एयरबेस से उड़ान भरने के बाद 100 किलोमीटर के दायरे में राफेल 40 टारगेट एक साथ पकड़ेगा। इसके लिए विमान में मल्टी डायरेक्शनल रडार फिट किया गया है। यानी 100 किलोमीटर पहले से ही राफेल के पायलट को मालूम चल जाएगा कि इस दायरे में कोई ऐसा टारगेट है, जिससे विमान को खतरा हो सकता है।
यह टारगेट दुश्मन के विमान भी हो सकते हैं। टू सीटर राफेल का पहला पायलट दुश्मनों के टारगेट को लोकेट करेगा। दूसरा पायलट लोकेट किए गए टारगेट का सिग्नल मिलने के बाद उसे बर्बाद करने के लिए राफेल में लगे हथियारों को ऑपरेट करेगा।
हवा में ही दुश्मन के विमान का राडार कर सकता है जाम
राफेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फाइटर जेट दुश्मन के विमान के राडार को हवा में ही जाम कर सकता है। ऐसा करने से यह विमान दुश्मन के विमान को न केवल गच्चा देने में सक्षम है, बल्कि दुश्मन के विमान को आसानी से हिट भी कर सकता है।
राफेल विमान के कॉकपिट में ऐसा सिस्टम डिजाइन किया गया है, जिससे युद्ध के दौरान पायलट का पूरा फोकस फ्लाइंग के साथ-साथ दुश्मन के टारगेट को हिट करने में एकाग्रता के साथ बना रहे। इसके लिए स्मार्ट टेबलेट बेस मिशन प्लानिंग एंड एनालिसिस सिस्टम को अपनाया गया है।
यह सिस्टम ऑपरेशन में पायलट की एकाग्रता को बनाए रखने में अहम साबित होगा। यूं कहें कि पायलट तुरंत टारगेट लोकेट करेगा और पूरी एकाग्रता के साथ उसे हिट करेगा इससे टारगेट मिस होने का चांस बहुत कम रहेगा।
3,700 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखने वाले फाइटर जेट राफेल भारत आने से न केवल एयर डिफेंस को मजबूती मिलेगी, बल्कि विजिलेंस भी मजबूत हो जाएगा। परमाणु हथियार समेत तमाम मारक हथियारों को इसके माध्यम से लॉन्च किया जा सकेगा।
हथियारों की स्टोरेज के लिए छह महीने की गारंटी भी होगी। इन सभी सुविधाओं के अलावा राफेल में राडार सिस्टम पर एक टन के कैमरे की सुविधा उपलब्ध है। यही सुविधा इसे तमाम लड़ाकू विमानों से पूरी तरह से अलग करती है।
एक टन के कैमरे से इसका निशाना अचूक होगा। कैमरा इतना सेंस्टिव (संवेदनशील) है कि जमीन पर छोटी से छोटी चीज को भी इससे देखा जा सकेगा। साधारण शब्दों में यदि कहा जाए तो इससे मछली की आंख यानि पिन प्वाइंट पर आसानी से निशाना लगाया जा सकेगा।
कई तरह की आधुनिक तकनीकों से लैस है राफेल
राफेल एक मिनट में करीब 60 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इससे भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। अभी तक भारतीय वायुसेना का मिग विमान अचूक निशाने के लिए जाना जाता था, लेकिन राफेल का निशाना इससे भी ज्यादा सटीक होगा। राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है।
ये युद्ध के समय अहम भूमिका निभाने में सक्षम है। हवाई हमला, जमीनी समर्थन, वायु वर्चस्व, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध ये सारी राफेल विमान की खूबियां हैं। तकनीक में उन्नत यह विमान हवाई निगरानी, ग्राउंड सपोर्ट, इन डेप्थ स्ट्राइक, एंटी-शर्प स्ट्राइक और परमाणु अभियानों को अंजाम देने में दक्ष है। इसमें मल्टी मोड रडार लगे हैं।
राफेल में अधिकतम भार 24500 किलोग्राम उठाकर उड़ने की क्षमता है। विमान में ईंधन क्षमता 17 हजार किलोग्राम है। यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है। इसे हर तरह के मिशन में भेजा जा सकता। 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी है।
150 किलोमीटर की दूरी तक इससे दागी जाने वाली मिसाइल दुश्मन की नजर में जल्दी से नहीं आती। साथ ही यह हवा से जमीन पर मार करने में भी सक्षम है। स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किलोमीटर है। राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा और 3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता। राफेल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है।