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Sri Lanka: 'भारत के सुरक्षा भाव को प्राथमिकता जरूरी', हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी पर पूर्व सेना प्रमुख

Wed, 07 Aug 2024 08:49 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

इस दौरान फोंसेका ने कहा कि कुछ महीने पहले श्रीलंका के जलक्षेत्र में चीन के निगरानी जहाज को लेकर हंगामा हुआ था। भारत ने इस पर अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में हमारे पड़ोसियों, खासकर क्षेत्रीय शक्ति होने के नाते भारत की चिंताओं को परेशान करने वाला कुछ भी नहीं होना चाहिए।  
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भारत-श्रीलंका। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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श्रीलंका के पूर्व सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सारथ फोंसेका ने हिंद महासागर में चीनी निगरानी जहाजों की उपस्थिति पर चिंता जताई है। उनकी चिंता विशेष रूप से श्रीलंकाई क्षेत्रीय जल क्षेत्र में चीन की उपस्थिति पर है। सारथ फोंसेका ने कहा कि वह श्रीलंका के क्षेत्र के भीतर किसी भी सैन्य उपस्थिति को मंजूरी नहीं देते हैं। साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा चिंताओं को समझने और संबोधित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी होने के नाते, हमारा भारत के साथ घनिष्ठ संबंध है। हम क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को अवश्य समझना चाहिए।

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इस दौरान फोंसेका ने कहा कि कुछ महीने पहले श्रीलंका के जलक्षेत्र में चीन के निगरानी जहाज को लेकर हंगामा हुआ था। भारत ने इस पर अपनी चिंता जाहिर की थी। भारत के साथ ही अमेरिका ने भी इसे लेकर प्रतिक्रिया दी थी। पूर्व सेना प्रमुख ने चीन की इस उपस्थिति को अनुचित बताया। साथ ही कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में हमारे पड़ोसियों, खासकर क्षेत्रीय शक्ति होने के नाते भारत की चिंताओं को परेशान करने वाला कुछ भी नहीं होगा। साथ ही उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो वह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के जलक्षेत्र या सीमा के भीतर किसी भी सैन्यकर्मी की उपस्थिति को मंजूरी नहीं देता। हमें भारत की सुरक्षा भावनाओं को प्राथमिकता देनी होगी। एक पड़ोसी होने के नाते, हमारा भारत के साथ घनिष्ठ संबंध है। हम क्षेत्र में भारतीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को अवश्य समझना चाहिए।  
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इस दौरान फोंसेका ने सितंबर में होने वाले श्रीलंका चुनाव में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की अपनी घोषणा पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मेरी कमान वाली सेना द्वारा श्रीलंका में आतंकवाद खत्म करने के तुरंत बाद मैं राजनीति में आया। उस वक्त युद्ध के अंतिम चरण में हमें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, प्रशासनिक मुद्दे थे और सैनिकों के लिए कोई सुविधाएं नहीं थीं। तब तत्कालीन सरकार को उन पहलुओं पर ध्यान देने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। सरकारी हलकों में भ्रष्टाचार बढ़ रहा था। राजनेता जानते थे कि नागरिकों के मुद्दों को कैसे देखा जाए और देश में स्थायी शांति कैसे स्थापित की जाए, लेकिन उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी। 

आगे बोलते हुए फोसेंका ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खिलाफ कार्रवाई करने और देश का विकास सुनिश्चित करने का की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राजनेताओं के पास कोई दूरदृष्टि नहीं है...हमें देश की राजनीतिक प्रकृति को बदलना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हम विकास लाएँ, और भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को रोकें। 

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