ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक गैस की नई खरीदारी में एशियाई देश फिलहाल आगे दिख रहे हैं। एलएनजी के एक ब्रोकर ने इस अखबार से कहा- ‘एशियाई देशों के पास अधिक क्रय शक्ति है। फिर यूरोप के पास पाइपलाइन की सप्लाई है। लेकिन चीन और जापान के पास ये विकल्प नहीं हैं।’ इस बीच आस्ट्रेलिया की एडवाइजरी फर्म एनर्जीक्वेस्ट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना महामारी के बाद गैस की एशिया और यूरोप में बढ़ी मांग के कारण ज्यादा एलएनजी खरीदने की एक होड़ लग गई है। इसकी वजह से खास कर अमेरिका और कतर ने गैस की कीमतें रिकॉर्ड सीमा तक बढ़ा दी हैं।
रूस की वेबसाइट रशिया टुडे पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एशिया में इस समय एलएनजी की कीमत जनवरी के बाद रिकॉर्ड स्तर पर हैं। पिछले हफ्ते एलएनजी का खरीद मूल्य 34.47 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तक पहुंच गया, जबकि जनवरी में भी ये कीमत 32.50 डॉलर ही थी।
गैस बाजार के विशेषज्ञ वॉरेन पीटरसन और वेनयू याओ ने वेबसाइट थिंक.आईएनजी.कॉम पर अपने एक विश्लेषण में लिखा है कि चीन ने जिस तरह कतर से अधिक गैस सप्लाई का समझौता किया है, उसका संकेत है कि अभी वह और ऐसे करार करेगा। उसकी वजह से यूरोपीय गैस बाजार पर दबाव बढ़ेगा। जानकारों के मुताबिक सारे ट्रेंड इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अभी काफी समय तक गैस और बिजली उत्पादन के स्रोतों की महंगाई जारी रहेगी।