फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉ. फॉसी ने फिर कहा: प्रयोगशाला में बनाई गई बीमारी हो सकती है कोरोना महामारी 

Sun, 20 Jun 2021 08:02 AM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • डॉ. एंथनी फॉसी ने माना- कोरोना एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है
  • संभव है कि  इसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया  
  • जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की भी संभावना जताई 
विज्ञापन
अमेरिकी डॉक्टर एंथनी एस फॉसी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले कुछ समय से अपने ईमेल को लेकर सुर्खियों में बने अमेरिका के महामारीविद डॉय एंथनी फॉसी ने कहा है कि कोरोना प्रयोगशाला में बनाई गई बीमारी हो सकती है। पिछले साल फरवरी में खुद वैज्ञानिकों ने भी यह बात स्वीकारी थी।

विज्ञापन


डॉ. फॉसी का कहना है, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 

एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 
विज्ञापन


एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 


कोरोना वायरस आज भी पहेली बनी हुई है। अमेरिकी वायरस विशेषज्ञ और राष्ट्रपति जो बाइडन के शीर्ष स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. एंथनी फॉसी पहले भी कह चुके हैं कि कोरोना एक प्राकृतिक बीमारी है, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता। एक साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि क्या यह वायरस प्राकृतिक है तो उन्होंने कहा था, मैं इस पर भरोसा नहीं करूंगा। उन्होंने कहा, इसकी जांच जरूरी है कि चीन की लैब में इसकी उत्पत्ति कैसे हुई?

चीन में डब्ल्यूएचओ के हाथ लगी निराशा
बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक टीम कोरोना वायरस के तथ्यों की जांच के लिए वुहान भी गई थी, लेकिन चीन ने कुछ क्षेत्रों में जांच नहीं करने दी या फिर सभी सबूत मिटा दिए। इस जांच में डब्ल्यूएचओ के हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लग पाया, जिसके चलते यह पुष्टि नहीं हो पाई कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से फैला है। बाद में वॉल स्ट्रीट जनरल की खुफिया रिपोर्ट में वुहान लैब से ही कोरोना वायरस के फैलने को लेकर दावा किया गया था। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें