अमेरिकी आईटी कंपनी ‘कासिया’ पर एक बड़ा रैनसमवेयर हमला हुआ है। इस साइबर हमले में कासिया के कॉर्पोरेट नेटवर्क और इसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाली दुनिया की कम से कम 1,000 कंपनियों को निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों को संदेह है कि इस हमले को रूस के साइबर अपराध समूह ‘रेविल’ ने अंजाम देते हुए कम से कम 17 देशों को निशाना बनाया है।
कासिया कंपनी ने 40,000 से ज्यादा कारोबारी घरानों को अपनी सेवाएं दी हैं जिनमें से करीब 1,000 कंपनियां हमले का शिकार बनी हैं। इस हमले के कारण स्वीडन की सबसे बड़ी सुपर बाजार शृंखला ‘कूप’ को भी अपने 800 से ज्यादा स्टोर बंद करने पड़े क्योंकि वे अपने खाते और चेकआउट्स तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे। शोधकर्ता विशेषज्ञों ने बताया कि रूस के कुख्यात ‘रेविल’ समूह ने यह हमला उन कंपनियों के माध्यम से किया जो कई ग्राहकों के लिए आईटी अवसंरचना का दूरस्थ रूप से प्रबंधन करती हैं।
रेविल ने मांस प्रसंस्करण कंपनी ‘जेबीएस’ से भी 1.1 करोड़ डॉलर की जबरन वसूली की थी। अमेरिका के संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने कहा है कि उनकी टीम ‘साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी’ के साथ मिलकर काम कर रही है कि रूस से जुड़े समूह ने कासिया कंपनी की निजता का हनन कैसे किया।
यदि रूस की संलिप्तता हुई तो कड़ा जवाब देंगे : बाइडन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि यदि क्रेमलिन (रूसी संसद) के इस रैनसमेयर हमले में शामिल होने की बात सामने आई, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। बाइडन ने कहा, उन्होंने खुफिया तंत्र से गहराई से मामले की जांच करने को कहा है। बाइडन ने एक माह पूर्व ही ‘रेविल’ और अन्य ‘रैनसमवेयर’ समूहों को पनाह ना देने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाया था। बाइडन ने इन समूहों की जबरन वसूली को अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बताया था।
स्वीडिश रेलवे और बड़ी फार्मेसी कंपनी भी प्रभावित
स्वीडन की सुपर बाजार शृंखला ‘कूप’ ने अपने स्टोर्स के बाहर साइनबोर्ड लगाकर ग्राहकों को बताया कि हम एक बड़ी आइटी गड़बड़ी की चपेट में आ गए हैं। फिलहाल हमारे सिस्टम ठप हैं। साइबर सुरक्षा कंपनी अनट्रेस लैब्स के शोधकर्ता जिन कंपनियों को निशाना बनाया गया, उनके साथ मिलकर मामले की जांच कर रहे हैं। फर्म ने कहा कि इस हमले से स्वीडिश रेलवे व एक बड़ी फार्मेसी शृंखला भी प्रभावित हुई है।
सिस्टम में ही डाटा लॉक कर बड़ी फिरौती मांगी
साइबर सुरक्षा कंपनी एम्सिसॉफ्ट के विश्लेषक ब्रेट कैलो ने बताया, हमले का शिकार कितनी कंपनियां बनीं, इसकी अभी सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन इस रैनसमवेयर हमले में इंक्रिप्शन के माध्यम से कंपनियों का डाटा उनके सिस्टम में ही लॉक कर दिया गया और इसे खोलने के एवज में साइबर अपराधी प्रभावितों से बड़ी फिरौती मांग रहे हैं। इन अपराधियों ने कई कारोबारियों से 50 लाख डॉलर तक की फिरौती मांगी है।