नाविकों, ट्रक ड्राइवरों और एयरलाइन कर्मचारियों ने कोरोना महामारी के दौरान आपूर्ति श्रृंखलाओं को चालू रखने के लिए यात्रा प्रतिबंध और जटिल कोविड-19 टीकाकरण और तमाम चुनौतियों का सामना किया। लेकिन लगता है जैसे असली चुनौतियां तो अब शुरू हुई हैं।
कोरोना प्रतिबंधों और सख्त नियमों के कारण हालात बिगड़ने लगे हैं जिससे दुनिया भर में माल ले जाने वाले बंदरगाहों, कंटेनर जहाजों और कंपनियों के बुरी तरह से उलझे नेटवर्क के लिए एक और खतरा पैदा हो गया है।
उद्योग समूहों ने लिखा खुला पत्र
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने वाले राष्ट्राध्यक्षों को बुधवार को एक खुले पत्र में इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग (आईसीएस) और अन्य उद्योग समूहों ने वैश्विक परिवहन प्रणाली के ढहने की चेतावनी दी। इन्होंने कहा कि अगर सरकारें परिवहन श्रमिकों को आने-जाने की छूट और उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त टीके प्राप्त करने के लिए प्राथमिकता नहीं देती व्यवस्था ढह जाएगी।
इन समूहों ने लिखा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला कम होने लगी हैं क्योंकि परिवहन कर्मचारियों पर दो साल से भारी दबाव है। इस पत्र पर इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA), इंटरनेशनल रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन (IRU) और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (ITF) ने भी हस्ताक्षर किए हैं। ये एक साथ मिलकर वैश्विक रूप से 65 मिलियन परिवहन श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आईसीएस के महासचिव गाइ प्लैटन ने कहा कि साल के अंत तक बुरी तरह श्रमिकों की कमी होने की संभावना है क्योंकि क्रिसमस के मद्देनजर नाविक नए अनुबंधों की शर्तों से जुड़ना नहीं चाहते हैं।
ब्रिटेन में दिख सकता है इसका बड़ा असर
यह सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ाएगा और ब्रिटेन में खाद्य और ईंधन आपूर्ति के साथ मौजूदा चुनौतियों को और बिगाड़ सकता है।
जब कैरिन मार्चल और उनके चालक दल को बताया गया कि जापान के होक्काइडो में उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तो यह मनोबल पर एक बड़ी चोट थी। कार ले जाने वाले जहाज की 28 वर्षीय मुख्य अधिकारी कैरीन ने कहा, हम में से कोई नहीं जानता था कि यह कब तक चलेगा।
यह बात 18 महीने से पहले की है। कैरीन और उनके जैसे सैकड़ों-हजारों नाविकों को तब से किनारे की छुट्टी की अनुमति नहीं दी गई है।
कर्मचारियों पर कोविड नियम पड़ रहे भारी
प्लैटन का कहना है कि हालांकि आंकड़ों में अब सुधार हुआ है, लेकिन चालक दल में बदलाव एक बड़ी चुनौती है। कुछ यात्रा प्रतिबंधों को कोरोना वायरस डेल्टा के कारण फिर से लागू किया गया है और परिवहन कर्मचारियों को अपना काम करने के लिए टीके और टेस्ट के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
प्लैटन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर टीकों में असमान वितरण है। केवल 25 से 30 फीसदी नाविक, जिनमें से कई भारत और फिलीपींस से हैं, पूरी तरह से टीका लगवा चुके हैं।
कोरोना वायरस परीक्षण भी एक चुनौती है। फरवरी में, जर्मनी ने ट्रक ड्राइवरों के लिए बिना किसी छूट के अनिवार्य पीसीआर परीक्षण की शुरुआत की थी। इटली सहित पड़ोसी देशों ने अपने ही इलाकों में फंसे हजारों ड्राइवरों के मद्देनजर इसी तरह के नियम लागू किए थे।
आईआरयू के महासचिव अम्बर्टो डी प्रेटो का कहना है कि ड्राइवरों ने महामारी के माध्यम से सीमा से जुड़े सैकड़ों मुद्दों और अवरोधों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि ट्रक ड्राइवर, नागरिकों और व्यवसायों ने गलत कोविड प्रतिबंधों की भारी कीमत चुकाई है जिनकी वजह से परिवहन श्रमिकों को छूट नहीं नहीं मिल पाई।