कोरोना वैक्सीन टीके का परीक्षण
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कोरोना वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में फाइजर कंपनी की दवा 90 फीसदी तक सफल रही है। कंपनी इस साल के अंत में वैक्सीन के एक करोड़ डोज ब्रिटिश सरकार को सौपेंगी। वैक्सीन के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता के हाथ तक पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें सबसे बड़ी कठिनाई वैक्सीन को ठंडा रखना है, जिसके लिए ड्राई आइस की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी। इसकी किल्लत हो सकती है।
माइनस 70 डिग्री तापमान जरूरी
हर व्यक्ति तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए इसे माइनस 70 डिग्री तापमान पर रखने की जरूरत होगी। ऐसे में कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती वैक्सीन को कंपनी से लेकर अस्पताल और नागरिकों तक परिवहन में इस तापमान को बनाए रखना होगी।
ड्राई आइस में रखी जाएगी वैक्सीन
फ्रोजन प्रोडक्ट के परिवहन विशेषज्ञ डॉ. एलेक्जेंडर एडवार्ड्स के मुताबिक केवल ड्राई आइस ही इसका एकमात्र विकल्प है। ड्राई आइस का औसत तापमान माइनस 78 डिग्री होता है। इस प्रक्रिया में एक दूसरी दिक्कत यह भी है कि बड़ी मात्रा में ड्राई आइस लगने से वे क्षेत्र संकट में पड़ जाएंगे, जहां अभी इसका इस्तेमाल हो रहा है।
फ्रोजन प्रोडक्ट पर पड़ेगा संकट
डॉ. एडवार्ड्स के मुताबिक ड्राई आइस घरेलू फ्रीजर (तापमान माइनस 20 डिग्री) से चार गुना ज्यादा ठंडी होती है। यही वजह है कि सुपर मार्केट के सामने फ्रोजन प्रोडक्ट बेचने का संकट खड़ा हो जाएगा। इन स्टोर में बड़े रेफ्रिजरेटर में ड्राई आइस इस्तेमाल होती है।
पार्टियों की रौनक फीकी होगी
नाइट क्लब, इवेंट और पार्टियों में भी स्मोक मशीन का इस्तेमाल मुश्किल से हो पाएगा। पार्टियां हल्की और बेरौनक हो जाएंगी। दरअसल पार्टियों में धुंध का माहौल बनाने के लिए इस मशीन का इस्तेमाल किया जाता है, जो ड्राई आइस की कमी से प्रभावित हो सकता है।
इस मशीन में ड्राई आइस का तेजी से गर्म किया जाता है और वह धुंध के रूप में निकलती है और सिनेमेटिक इफेक्ट पैदा करती है। बता दें कि ठोस कार्बन डाइऑक्साइड की ड्राई आइस होती है। आइसक्रीम बनाने और बर्फ के स्कल्पचर को पिघलने से बचाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।