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टला नहीं खतरा: सामने आया कोरोना का नया वैरिएंट ‘म्यू’, इसपर बेअसर हो सकता है टीका

Fri, 03 Sep 2021 07:12 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, जिनेवा

सार

  • डब्ल्यूएचओ ने जताई चिंता, कहा- नया वैरिएंट कई म्यूटेशन का जोड़
  • जनवरी में पहली बार कोलंबिया में मिला था, बेहतर ढंग से समझने के लिए नए शोध जरूरी
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कोरोना का नया खतरा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ‘म्यू’ पर चिंता जताते हुए कहा है कि यह कई म्यूटेशन का जोड़ है। इस पर टीका बेअसर हो सकता है। यह वैरिएंट जनवरी, 2021 में पहली बार कोलंबिया में मिला था। इसका वैज्ञानिक नाम बी.1621 है। डब्ल्यूएचओ इस पर नजर बनाए हुए है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी पर अपने साप्ताहिक बुलेटिन में कहा कि ‘म्यू’ को ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। यह वैरिएंट कई म्यूटेशन का जोड़ है, जो टीके से बनी प्रतिरक्षा से बचने में कारगर है। इसका मतलब है कि इसके म्यूटेशन कोरोना के खिलाफ टीका लगवाने के बाद भी शरीर पर अटैक कर सकते हैं। संगठन ने कहा कि यह वैरिएंट अपना रूप बदल रहा है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे अध्ययन की जरूरत है।

बुलेटिन के मुताबिक,  कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ‘म्यू’ वैरिएंट की वैश्विक व्यापकता में गिरावट आई है। वर्तमान में यह 0.1 फीसदी से भी कम है। यानी वैश्विक स्तर पर इसके प्रसार की रफ्तार उतनी नहीं है। हालांकि, कोलंबिया (39 फीसदी) व इक्वाडोर (13 फीसदी) में प्रसार बढ़ रहा है। अन्य देशों में भी छिटपुट मामले सामने आए हैं। यूरोप व दक्षिण अमेरिका में गंभीर असर देखने को मिला है। ब्रिटेन, अमेरिका और हांगकांग में भी 'म्यू’ के मामले सामने आए हैं।
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भारत में अब तक नहीं मिला यह स्वरूप
चिंताजनक बताया जा रहा कोरोना का म्यू वैरिएंट अब तक भारत में नहीं मिला है। इसके अलावा एक और म्यूटेशन सी.1.2 का कोई केस भी देश में नहीं आया है। भारत में वायरस के 232 से अधिक म्यूटेशन सामने आ चुके हैं। नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के डॉ. विनोद स्कारिया के मुताबिक म्यू (बी.1.621 और बी. 1.621.1) का एक भी मामला भारत में अब तक दर्ज नहीं हुआ है। देशभर में जीनोम सीक्वेंसिंग की निगरानी क रहे वैज्ञानिकों में से एक डॉ. स्कारिया ने कहा, पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने म्यू वैरिएंट को गंभीर बताया है। अब तक मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि इस नए वैरिएंट में आनुवाशिंक परिवर्तन होते हैं। सामुदायिक प्रसार की क्षमता के कारण डेल्टा वैरिएंट की तरह ही यह आक्रामक हो सकते हैं।
 
निगरानी सूची में पांचवां स्वरूप
इस साल मार्च के बाद से म्यू पांचवां ऐसा स्वरूप है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन की निगरानी सूची में डाला गया है। 39 देशों में इसका पता चलने के बाद 30 अगस्त को इसे डब्ल्यूएचओ की निगरानी सूची में रखा गया है। इनमें अल्फा और डेल्टा वैरिएंट शामिल हैं।
 
यूरोप और दक्षिण अमेरिका में गंभीर असर
संयुक्त राष्ट की स्वास्थ्य एजेंसी के बुलेटिन में कहा गया है कि इस नए वायरस म्यूटेशन के उभरने से व्यापक चिंता बनी है। इसकी प्रमुख वजह वैश्वक स्तर पर संक्रमण दर का फिर से बढ़ना है। विशेषज्ञों ने नए वैरिएंट का प्रसार रोकने के लिए लगातार निगरानी का सलाह दी है।

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